प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में उत्तर प्रदेश के आगरा के सिंगना में अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (CSARC) की स्थापना को मंजूरी दी गई है। यह निर्णय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रस्ताव पर लिया गया, जिसका उद्देश्य आलू और शकरकंद की उत्पादकता बढ़ाना, कटाई के बाद के प्रबंधन में सुधार करना और मूल्य संवर्धन के जरिए किसानों की आय और रोजगार के अवसरों को मजबूत करना है।
खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मिलेगा बल
इस नए क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना का मुख्य लक्ष्य भारत सहित दक्षिण एशिया में खाद्य और पोषण सुरक्षा को मजबूत बनाना है। आलू और शकरकंद जैसे कंद फसलों में पोषण के साथ-साथ विपणन और प्रसंस्करण की विशाल संभावनाएं हैं। केंद्रीय सरकार का मानना है कि इस केंद्र के माध्यम से देश में कृषि नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को नया आयाम मिलेगा।

कृषि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत में आलू आधारित उद्योग—जैसे उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन—में बड़ी संख्या में रोजगार सृजन की क्षमता है। इस क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना से स्थानीय किसानों को बेहतर बीज, वैज्ञानिक जानकारी और वैश्विक तकनीकों तक पहुंच मिलेगी, जिससे उनकी उत्पादकता और आमदनी दोनों बढ़ सकेंगी।
वैश्विक मानकों की फसलें होंगी विकसित
इस संस्थान द्वारा विकसित की जाने वाली उच्च उत्पादकता वाली, पोषण से भरपूर और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल आलू व शकरकंद की किस्में न केवल भारत में, बल्कि दक्षिण एशिया के अन्य देशों में भी खेती को नई दिशा देंगी। यह केंद्र वैश्विक अनुसंधान नेटवर्क का हिस्सा होगा, जिससे देश को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्रशिक्षण और शोध का लाभ मिलेगा।
सिंगना को मिलेगा वैश्विक पहचान
आगरा जिले के सिंगना गांव में बनने वाला यह केंद्र क्षेत्र के लिए कृषि क्षेत्र में वैश्विक मान्यता लाने वाला होगा। स्थानीय युवाओं के लिए यह न केवल रोजगार बल्कि शिक्षा और प्रशिक्षण का भी माध्यम बनेगा। इससे क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
यह भी पढ़ें: आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी श्रद्धांजलि
केंद्र सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय भारत की स्मार्ट कृषि और आत्मनिर्भर किसान की दिशा में एक और बड़ा कदम है। यह परियोजना न केवल देश की खाद्य सुरक्षा नीति को मजबूती प्रदान करेगी, बल्कि किसानों को आर्थिक रूप से समर्थ और सशक्त भी बनाएगी। आलू और शकरकंद के क्षेत्र में वैज्ञानिक नवाचार और वैश्विक सहयोग के माध्यम से भारत को इस क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका में लाने का प्रयास अब साकार होता दिख रहा है।









