प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर लोकतंत्र और संविधान की रक्षा में अपना सब कुछ न्यौछावर करने वाले वीरों को याद किया गया। मंत्रिमंडल ने आपातकाल के दौरान संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में किए गए संघर्ष को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उन्हें गंभीर हमला करार दिया और इस अवसर पर दो मिनट का मौन भी रखा गया।
संविधान की हत्या के प्रयास को दी गई चुनौती
मंत्रिमंडल ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय बताया। इस दौरान न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं को कुचला गया, बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता को भी छीन लिया गया था। मंत्रिमंडल ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह हमला 1974 में शुरू हुए नवनिर्माण आंदोलन और जेपी (जयप्रकाश नारायण) के सम्पूर्ण क्रांति अभियान को दबाने की कोशिश से शुरू हुआ था।
लोकतंत्र के रक्षकों को किया नमन
बैठक में सभी मंत्रियों ने उन नागरिकों, नेताओं, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने आपातकाल के दौरान तानाशाही प्रवृत्तियों का विरोध किया और जेलों में अमानवीय यातनाएं सहने के बावजूद अपने विचारों से समझौता नहीं किया। इन्हीं योद्धाओं के प्रयासों से देश को दोबारा लोकतंत्र की राह पर लाया जा सका।

युवाओं और वरिष्ठों को सीख लेने का आह्वान
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खास तौर पर युवा पीढ़ी और वरिष्ठ नागरिकों से आह्वान किया कि वे इस संघर्ष से प्रेरणा लें और संविधान, संघवाद, मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हमेशा सजग रहें। यह अवसर सिर्फ स्मरण का नहीं, बल्कि भविष्य के लिए सदियों तक बनी रहने वाली चेतना का प्रतीक है।
वर्ष 2025: संविधान हत्या दिवस की 50वीं वर्षगांठ
वर्ष 2025 में आपातकाल की घोषणा की पचासवीं वर्षगांठ मनाई जाएगी, जिसे मंत्रिमंडल ने ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में चिन्हित किया है। इस दिन को संविधान की आत्मा पर किए गए हमले और उसके विरुद्ध हुए संघर्ष के रूप में जन स्मृति में जीवंत रखने की योजना बनाई जा रही है।
भारत: लोकतंत्र की जननी
मंत्रिमंडल ने यह भी दोहराया कि भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, बल्कि वह लोकतंत्र की जननी भी है। भारतीय संविधान में निहित मूल्य—स्वतंत्रता, समानता, गरिमा और न्याय—हमारे राष्ट्रीय चरित्र की पहचान हैं। इनकी रक्षा करना हर नागरिक और संस्था की साझी जिम्मेदारी है।
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इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्र सरकार ने संदेश दिया है कि आपातकाल भले ही अतीत की बात हो, लेकिन उसका स्मरण लोकतंत्र के संरक्षण के लिए निरंतर सजगता का आह्वान है।









