जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से लंबित पंचायत और जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनावों को लेकर तस्वीर जल्द साफ हो सकती है। राज्य चुनाव आयोग ने सरकार को चुनाव कार्यक्रम को लेकर समय-सीमा स्पष्ट कर दी है। आयोग के मुताबिक, अगर इसी साल अक्टूबर-नवंबर में चुनाव कराने हैं तो सरकार को अगस्त के अंत तक अपना निर्णय लेना होगा। फैसला टलने पर चुनाव अगले साल मार्च-अप्रैल तक खिसक सकते हैं।
आयोग ने सरकार को चुनाव की तैयारियों, मतदाता सूची और आरक्षण प्रक्रिया सहित जरूरी औपचारिकताओं की जानकारी दे दी है। सर्दियों में बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण दिसंबर से चुनावी गतिविधियों में मुश्किलें आने की संभावना है। ऐसे में अक्टूबर-नवंबर की विंडो महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अक्टूबर-नवंबर में चुनाव के लिए क्या करना होगा?
चुनाव आयोग के सामने पंचायत और डीडीसी चुनाव कराने से पहले कई प्रक्रियाएं पूरी करने की चुनौती है। इनमें 1 अक्टूबर को कट-ऑफ तारीख मानकर विशेष संक्षिप्त मतदाता पुनरीक्षण कराना प्रमुख है।
इसके तहत 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं को मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। साथ ही चुनाव में ओबीसी आरक्षण, महिलाओं, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों के रोटेशन जैसी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होंगी।
इसके अलावा बैलेट बॉक्स और अन्य चुनावी सामग्री की खरीद सहित चुनाव संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी समय पर पूरा करना होगा।
ओबीसी आरक्षण पर सरकार के फैसले का इंतजार
जम्मू-कश्मीर में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए ओबीसी आरक्षण का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। राज्य चुनाव आयोग ने सरकार को ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर निर्णय लेने के लिए दो बार पत्र भेजा है।
सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जेआर कोतवाल की अध्यक्षता वाले आयोग ने फरवरी 2025 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। हालांकि, रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
सरकार की मंजूरी के बाद ही स्थानीय निकायों में ओबीसी के लिए आरक्षित वार्डों और सीटों का निर्धारण तथा आरक्षण के रोटेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। इसलिए चुनाव कार्यक्रम तय करने में इस रिपोर्ट पर सरकार का फैसला अहम भूमिका निभा सकता है।
जम्मू-कश्मीर में ओबीसी को 8 फीसदी आरक्षण
केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय शासन के दौरान ओबीसी के लिए शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 8 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू की थी। इसके बाद स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण का उचित प्रतिशत तय करने के लिए आयोग का गठन किया गया।
अब स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी के लिए सीटों का आरक्षण किस अनुपात में होगा, यह संबंधित रिपोर्ट पर सरकार के निर्णय के बाद स्पष्ट होगा।
चुनाव सामग्री की खरीद के लिए आयोग तैयार
राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव सामग्री की खरीद से संबंधित निविदाओं की प्रक्रिया पूरी कर ली है। हालांकि, इन निविदाओं को औपचारिक रूप से तभी जारी किया जाएगा, जब सरकार स्थानीय निकाय चुनाव कराने का फैसला करेगी।
आयोग की योजना के मुताबिक पंचायत और जिला विकास परिषद चुनाव एक ही चरण में या समान चुनावी प्रक्रिया के तहत कराने की तैयारी है। दोनों चुनाव मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े हैं।
इसके बाद शहरी इलाकों में नगर निकाय चुनाव कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
पंचायत चुनाव के बाद ही संभव होंगे बीडीसी चुनाव
ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल (बीडीसी) के अध्यक्षों का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान से नहीं होता। उनका निर्वाचन पंचायत सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। इसलिए पहले नई पंचायतों का गठन जरूरी होगा।
यही वजह है कि पंचायत चुनाव के बाद ही बीडीसी अध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
ढाई साल से पंचायतों में नहीं है निर्वाचित व्यवस्था
जम्मू-कश्मीर में पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल 9 जनवरी 2024 को समाप्त हो गया था। इसी के साथ ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल का कार्यकाल भी खत्म हो गया। वहीं नगर निकायों का कार्यकाल अक्टूबर-नवंबर 2023 में पूरा हुआ था।
जिला विकास परिषदों का कार्यकाल बाद में 24 फरवरी 2026 को समाप्त हुआ। इसके चलते जम्मू-कश्मीर में स्थानीय लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव लंबे समय से लंबित हैं।
जम्मू-कश्मीर में पिछली व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि पहली बार पंचायती राज व्यवस्था के तीनों स्तरों—पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर—पर निर्वाचित संस्थाएं एक साथ काम कर रही थीं।
अब अगस्त के फैसले पर टिकी नजर
चुनाव आयोग की ओर से सरकार को दी गई समय-सीमा के बाद अब सभी की नजर अगस्त के अंत तक होने वाले सरकारी फैसले पर है। यदि सरकार समय रहते चुनाव कराने की मंजूरी देती है तो अक्टूबर-नवंबर में पंचायत और डीडीसी चुनाव कराने का रास्ता खुल सकता है।
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वहीं निर्णय में देरी होने पर मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण चुनाव कार्यक्रम को मार्च-अप्रैल 2027 तक आगे बढ़ाना पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार का फैसला जम्मू-कश्मीर की स्थानीय राजनीति और ग्रामीण प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा।








