कॉमेडियन समय रैना को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ से जुड़े मामले में दिव्यांग व्यक्तियों को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के संबंध में समय रैना और चार अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही खत्म करने का आदेश दिया है।
अदालत ने यह फैसला उस समय सुनाया, जब मामले में याचिकाकर्ता एनजीओ ने बताया कि समय रैना अब संगठन के संपर्क में हैं और स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (एसएमए) से प्रभावित लोगों की उपलब्धियों और उनके बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए काम करने को तैयार हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि समय रैना और अन्य लोगों की ओर से दिव्यांग व्यक्तियों के बीच जागरूकता बढ़ाने और उनके लिए फंड जुटाने की दिशा में प्रयास किए गए हैं। अदालत ने इन प्रयासों को सकारात्मक कदम माना।
बेंच ने कहा कि जब किसी पहल के पीछे ईमानदार प्रयास होते हैं, तो उसके अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि आरोपी युवा हैं और यदि वे अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाते हैं, तो इसका सकारात्मक असर हो सकता है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी कॉमेडियन से संबंधित आपराधिक कार्यवाही को समाप्त किया जा रहा है। आदेश के मुताबिक, संबंधित आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उनसे जुड़ी बाकी आपराधिक कार्यवाही भी खत्म कर दी गई है।
दिव्यांगों से जुड़े कंटेंट पर आगे भी होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को पूरी तरह समाप्त नहीं किया है। अदालत ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों से जुड़े कंटेंट की निगरानी और ऐसे मामलों में बेहतर व्यवस्था तैयार करने जैसे व्यापक मुद्दों पर सुनवाई आगे जारी रहेगी।
बेंच का मानना है कि दिव्यांग समुदाय के लोगों से सुझाव लेकर यह समझने की जरूरत है कि ऐसे कंटेंट की निगरानी किस तरह बेहतर तरीके से की जा सकती है। इन सुझावों के आधार पर भविष्य के लिए उपयुक्त दिशा-निर्देश तैयार किए जा सकते हैं।
अदालत ने व्यापक मुद्दे पर निर्देश जारी करने के लिए मामले को दोबारा सूचीबद्ध करने की बात कही है।
क्या है ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद?
यह पूरा विवाद ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के एक एपिसोड से जुड़ा है, जिसे 14 नवंबर 2024 को मुंबई के खार स्थित हैबिटैट में शूट किया गया था। बाद में एपिसोड ऑनलाइन प्रसारित हुआ।
कार्यक्रम में शामिल कुछ कॉमेडियन और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर दिव्यांग व्यक्तियों को लेकर कथित असंवेदनशील टिप्पणियां करने के आरोप लगे थे। विवाद बढ़ने के बाद अलग-अलग स्थानों पर आपराधिक मामले दर्ज किए गए।
मामले ने सोशल मीडिया कंटेंट, कॉमेडी में अभिव्यक्ति की सीमा और दिव्यांग व्यक्तियों की गरिमा से जुड़े सवालों को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया था।
रणवीर इलाहाबादिया की याचिका अभी लंबित
इसी विवाद से जुड़े एक अन्य मामले में यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया की याचिका अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उनके खिलाफ भी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर मामले दर्ज किए गए थे।
रणवीर इलाहाबादिया, जिन्हें उनके यूट्यूब चैनल ‘बीयर बाइसेप्स’ के नाम से भी जाना जाता है, ने अपने खिलाफ दर्ज मामलों में राहत की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अदालत ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी। हालांकि, उनकी याचिका पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।
कोर्ट के फैसले का क्या मतलब है?
समय रैना और चार अन्य आरोपियों के लिए इस आदेश का सीधा मतलब यह है कि इस मामले से जुड़ी उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो गई है। हालांकि, दिव्यांग व्यक्तियों से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी और भविष्य में ऐसी सामग्री से निपटने के व्यापक कानूनी एवं नीतिगत सवालों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई जारी रहेगी।
यह भी पढ़ें: Airtel 299 Plan Discontinued: एयरटेल ने बंद किया 299 रुपये वाला प्लान
यह फैसला एक ओर आरोपियों को कानूनी राहत देता है, वहीं दूसरी ओर दिव्यांग व्यक्तियों की गरिमा और डिजिटल कंटेंट की जवाबदेही से जुड़े बड़े सवालों पर अदालत के आगे के रुख की दिशा भी तय कर सकता है।








