इज़राइल और ईरान के बीच तनाव जारी है। एक बड़े सैन्य अभियान में, इज़राइल के 60 लड़ाकू विमानों ने ईरान के मिसाइल लॉन्चिंग स्थलों को निशाना बनाया है। इजराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने इस हमले की पुष्टि की है, जिसे एक बड़े पैमाने पर की गई जवाबी कार्रवाई के रूप में अंजाम दिया गया।
इजराइल और ईरान के बीच शुक्रवार से शुरू हुए संघर्ष में लगातार दोनों तरफ से हमले हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच तेज बयानबाज़ी भी देखने को मिल रही है और अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह विचार कर रहे हैं कि क्या इजराइल के साथ मिलकर ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला किया जाए?
इस संघर्ष की शुरुआत तब हुई जब इजराइल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने इजराइल पर हवाई हमले किए।
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ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजराइली हमलों में अब तक 220 से अधिक लोग मारे गए हैं, जबकि इजराइल का कहना है कि ईरानी हमलों में 24 लोग मारे गए हैं।
ऑपरेशन राइजिंग लायन और ईरानी जवाबी हमला
गुरुवार 12 जून को, IDF ने तेहरान के 18 जिलों, जिसमें कई सैन्य भवन और रिहायशी इलाक़े शामिल हैं, वहां के लोगों से इलाके को खाली करने की अपील की।
कुछ ही घंटों बाद, शुक्रवार तड़के लगभग 03:30 बजे (स्थानीय समयानुसार) तेहरान में पहले हवाई हमलों की खबरें सामने आईं, जिनमें राजधानी के रिहायशी इलाकों पर हमले हुए।
इजराइल ने दावा किया कि उसने तेहरान से लगभग 225 किमी दूर स्थित नतांज़ परमाणु केंद्र को निशाना बनाया, जिससे वहां गंभीर क्षति हुई है।
इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि यह हमला, जिसे ऑपरेशन राइजिंग लायन नाम दिया गया, ईरान के परमाणु कार्यक्रम के ‘दिल’ पर किया गया हमला था।
नेतन्याहू ने कहा, ‘अगर ईरान को नहीं रोका गया, तो वह बहुत कम समय में परमाणु हथियार बना सकता है।’ जबकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा कि इज़राइल को कड़ी सजा के लिए तैयार रहना चाहिए, जबकि ईरान के विदेश मंत्री ने इस हमले को ‘युद्ध की घोषणा’ करार दिया।
ईरान का जवाब, ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3
ईरान ने कुछ ही घंटों में जवाबी कार्रवाई की। उसने ‘दर्जनों ठिकानों, सैन्य केंद्रों और वायुसेनाओं’ पर बैलिएस्टिक मिसाइलों से हमला किया, जिसे उसने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3 नाम दिया।
IDF के अनुसार, करीब 100 मिसाइलें इज़राइल पर दागी गईं, जिनमें से अधिकांश को उसके आयरन डोम डिफेंस सिस्टम ने बीच में ही नष्ट कर दिया। इस पूरी घटना से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसकी निगरानी कर रहा है।









