Jolly LLB 3 Movie Review: बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार और अरशद वारसी की मोस्ट अवेटेड फिल्म जॉली एलएलबी-3 सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। सुभाष कपूर एक बार फिर लेखक-निर्देशक के रूप में लौटे हैं और अदालत की हलचल को परदे पर उतारा है। इस बार मामला हिट-एंड-रन या फर्जी एनकाउंटर का नहीं है।
कहानी की शुरुआत राजस्थान में एक किसान की आत्महत्या से होती है, जिसने अपनी जमीन खो दी थी। प्लॉट 2011 में उत्तर प्रदेश में हुए भूमि अधिग्रहण आंदोलन पर आधारित है और धीरे-धीरे बड़ा होता जाता है। कहानी के केंद्र में है हरिभाई खेतान (गजराज राव), भारत का सबसे अमीर उद्योगपति, जिसका सपना है ‘बीकानेर से बॉस्टन’ टाउनशिप बनाना, उस जमीन पर जो किसानों से छीनी गई है। दोनों जॉली, अरशद वारसी और अक्षय कुमार खुद को इस केस में फंसा हुआ पाते हैं और कोर्टरूम में एक ज़बरदस्त भिड़ंत के लिए तैयार हो जाते हैं।
कपूर का टेम्पलेट पहले जैसा ही है। किरदार अपने-अपने रोल्स में आसानी से फिट हो जाते हैं और दर्शक तुरंत जुड़ जाते हैं। कहानी सीधी-सादी है और पहला हाफ आसानी से गुजरता है, हालांकि इंटरवल से ठीक पहले का सीन, जो असरदार होना चाहिए था, फीका पड़ जाता है।
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दमदार दूसरा हाफ
फिल्म का असली वजन दूसरे हिस्से में दिखता है। यहां से न्याय पाने की लड़ाई असल रूप में सामने आती है। हालांकि म्यूज़िक यहां कमजोर कड़ी साबित होता है। एक इमोशनल गाना अनावश्यक लगता है और कहानी की रफ्तार धीमी कर देता है।
एक्टिंग का जलवा
फिल्म को संभालते हैं इसके कलाकार। अक्षय कुमार अपनी शरारती स्टाइल और मज़ेदार वन-लाइनर्स से जॉली को रोशन करते हैं और कोर्टरूम मोनोलॉग भी दमदार तरीके से पेश करते हैं। अरशद वारसी अपनी सहज कॉमिक टाइमिंग से चमकते हैं और अक्षय के साथ उनकी केमिस्ट्री जबरदस्त लगती है।
कमजोर कड़ी है विलेन का किरदार। गजराज राव अच्छे अभिनेता हैं, स्क्रीन पर दम भी लाते हैं, लेकिन उनकी भूमिका कई जगहों पर घिसी-पिटी लगती है। यहां दोष लेखन का है।
सौरभ शुक्ला एक बार फिर जज के रूप में शानदार हैं। उनकी स्क्रीन प्रेज़ेंस याद दिलाती है कि वे इस फ्रेंचाइज़ी का अभिन्न हिस्सा क्यों हैं। सीमा बिस्वास (जानकी राजाराम सोलंकी) कहानी को मजबूती देती हैं और राम कपूर एक वकील के रूप में प्रभाव छोड़ते हैं।
महिला किरदारों को ज़्यादा महत्व नहीं मिला। हुमा कुरैशी (जॉली 2 की पत्नी) और अमृता राव (जॉली 1 की पत्नी) को खास मौके नहीं मिले और वे बैकग्राउंड तक सीमित रह गईं।
क्यों देखें ये फिल्म?
कुल मिलाकर, जॉली एलएलबी 3 शायद पहली दो फिल्मों से ऊपर न ठहरे, लेकिन यह कोर्टरूम ड्रामा की आत्मा को जिंदा रखती है। हंसी-मज़ाक और दमदार अदाकारी के साथ यह फिल्म सीरीज़ में एक ठीक-ठाक जोड़ है।









