भारतीय शतरंज के लिए यह गर्व और जश्न का क्षण है। महिला FIDE शतरंज विश्व कप के फाइनल में पहली बार दो भारतीय खिलाड़ी आमने-सामने होंगी। 38 वर्षीय कोनेरू हंपी ने चीन की लेई टिंगजी को हराकर फाइनल में जगह बनाई, जहां उनका सामना अब 19 वर्षीय युवा सनसनी दिव्या देशमुख से होगा, जिन्होंने पहले ही चीन की पूर्व विश्व चैम्पियन तान झोंगई को हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली थी।
यह सिर्फ एक मुकाबला नहीं, बल्कि दो पीढ़ियों की भिड़ंत है — अनुभवी हंपी बनाम युवा जोश से लबरेज दिव्या। जहां हंपी का अनुभव और रणनीतिक पकड़ उनकी ताकत है, वहीं दिव्या का आत्मविश्वास और आक्रामक खेल शैली उन्हें खतरनाक बनाता है।
हंपी ने अपने सेमीफाइनल मुकाबले में आठ गेम्स तक चले कड़े संघर्ष के बाद जीत दर्ज की। क्लासिकल मुकाबले बराबरी पर खत्म हुए, जिसके बाद टाईब्रेक में दोनों खिलाड़ियों ने दमदार खेल दिखाया। लेई टिंगजी ने पहले बढ़त बनाई, लेकिन हंपी ने जबरदस्त वापसी करते हुए न सिर्फ अगला गेम जीता, बल्कि अंततः तीन गेम लगातार जीतकर मुकाबला अपने नाम किया।

निर्णायक ब्लिट्ज मुकाबले में, जहां समय बेहद कम था और हर चाल महत्वपूर्ण, हंपी ने मानसिक मजबूती और अनुभव का परिचय दिया। 44वीं चाल पर लेई की एक चूक (Ra6) ने उन्हें भारी कीमत चुकाई। हंपी ने मौके का फायदा उठाया और मैच का रुख पलटते हुए जीत दर्ज की।
जीत के बाद फीडे से बातचीत में हंपी ने कहा, “यह भारतीय शतरंज के लिए बेहद खास पल है। अब तो खिताब भारत में ही आने वाला है। दिव्या ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है, फाइनल में भी मुकाबला कड़ा होगा।”
इस ऐतिहासिक फाइनल के साथ ही यह भी तय हो गया है कि कम से कम दो भारतीय महिलाएं आगामी फीडे महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में खेलेंगी, जो महिला विश्व चैंपियनशिप के लिए चुनौती पेश करने वाली शीर्ष आठ खिलाड़ियों का टूर्नामेंट है। अन्य भारतीय खिलाड़ी — वैशाली रमेशबाबू, हरिका द्रोणावल्ली और वंतिका अग्रवाल के पास भी क्वालीफाई करने के अवसर बाकी हैं।
फिलहाल, दुनिया की निगाहें बटुमी, जॉर्जिया में होने वाले इस ऐतिहासिक फाइनल पर टिकी हैं — जहां भारत की दो बेटियां, हंपी और दिव्या, शतरंज के ताज के लिए भिड़ेंगी। जो भी जीते, विजेता भारत ही होगा।









