राजधानी दिल्ली में वर्षों से अधूरा पड़ा बारापुला फ्लाईओवर विस्तार परियोजना अब भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के घेरे में आ गई है। उपराज्यपाल (LG) वीके सक्सेना ने परियोजना में अनावश्यक देरी, लागत में भारी बढ़ोतरी और संदिग्ध मध्यस्थता भुगतान की जांच के आदेश दिए हैं। यह जांच दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) द्वारा की जाएगी।
एक दशक से लटकी परियोजना पर सवाल
बारापुला फ्लाईओवर (फेज-3), जो सराय काले खां को मयूर विहार से जोड़ने वाला अहम कॉरिडोर है, 2015 में शुरू होकर 6 महीने में पूरा होना था, लेकिन आज तक इसका सिर्फ 87% ही निर्माण पूरा हुआ है। इतने वर्षों में परियोजना की लागत कई सौ करोड़ बढ़ चुकी है और सरकार को L&T कंपनी को तीन बार मध्यस्थता के जरिए मुआवजा देना पड़ा, जिससे जनता के पैसे पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
LG ने जताई ‘नीतिगत चूक’ की आशंका
एलजी वीके सक्सेना ने कहा कि इस तरह की देरी सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि सरकार की परियोजना प्रबंधन नीतियों में मूलभूत खामियों को भी उजागर करती है। उन्होंने विशेष रूप से यह सवाल उठाया कि क्या बड़े ठेकेदार जानबूझकर देरी करके सरकार से मध्यस्थता के जरिए लाभ उठाते हैं?
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इसी ठेकेदार कंपनी (L&T) ने भारत मंडपम अंडरपास परियोजना में भी लापरवाही दिखाई थी, जो जी20 शिखर सम्मेलन से पहले बड़ा संकट बन सकता था।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सिफारिश पर हुई कार्रवाई
बारापुला परियोजना की समीक्षा 28 जुलाई 2025 को हुई Expenditure Finance Committee (EFC) बैठक में की गई थी, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की थी। बैठक में सर्वसम्मति से ACB जांच की सिफारिश की गई। समिति ने कहा: “जिन अधिकारियों ने बिना अधिकार के मध्यस्थता के फैसले स्वीकार किए, परियोजना में देरी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।”
PWD विभाग ने इस सिफारिश को Vigilance निदेशालय को भेजा, जिसके बाद LG से ACB जांच की मंजूरी मांगी गई और उन्हें सभी जरूरी फाइलें सौंपने के निर्देश जारी हुए।
किन कारणों से हुई देरी?
आंतरिक जांच समिति (PWD द्वारा गठित) ने नवंबर 2023 में अपनी रिपोर्ट में बताया कि देरी के मुख्य कारण थे:
- भूमि अधिग्रहण में 8 वर्षों की देरी, जबकि 3 साल में पूरा हो जाना चाहिए था।
- पेड़ों की कटाई के लिए पर्यावरण अनुमति में देरी (2023 तक अटकी रही फाइल)
- PWD ने समय पर फाइलें आगे बढ़ाईं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और विभागीय अनुमति में देरी हुई।
मध्यस्थता में हुआ ₹170 करोड़ से अधिक का भुगतान
- तीन मध्यस्थता मामलों में L&T ने कुल ₹750 करोड़ से अधिक का दावा किया।
- दो मामलों में ₹44.31 करोड़ और ₹36.42 करोड़ का भुगतान पहले ही हो चुका है।
- तीसरे मामले में ₹121.95 करोड़ + ब्याज + GST का अवार्ड पास हुआ।
- फाइनेंस डिपार्टमेंट और कानूनी सलाह के बाद इस अवार्ड को स्वीकार किया गया।
- लेकिन भुगतान में बार-बार फाइल लौटने से देरी हुई, और अंत में दिल्ली हाईकोर्ट ने PWD के तीन बैंक खाते अटैच कर ₹170.27 करोड़ Court Registry में जमा कराने का आदेश दिया।
अब कई विभाग जांच के घेरे में
सूत्रों के अनुसार, इस जांच में PWD, राजस्व विभाग और दिल्ली ट्रांसपोर्ट एवं इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (DTL) शामिल हो सकते हैं। उन अधिकारियों की भी जांच होगी जिन्होंने मध्यस्थता के निर्णयों को स्वीकृति दी या लापरवाही बरती।
भविष्य के लिए सख्त निर्देश और सुधार की योजना
LG सक्सेना ने यह भी निर्देश दिया है कि आगे से किसी भी बड़ी परियोजना के लिए:
- पर्यावरण और प्रशासनिक मंजूरी पहले ली जाए
- ठेके में मध्यस्थता शर्तों की समीक्षा हो
- ठेकेदारों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए
एक EFC सदस्य ने कहा, “बारापुला प्रोजेक्ट उस विफलता का प्रतीक बन गया है, जो तब होती है जब मंजूरी में देरी होती है, जवाबदेही कमजोर होती है और निगरानी तंत्र निष्क्रिय हो जाता है।”
टाइमलाइन: बरापुला प्रोजेक्ट का सफर
| वर्ष | घटनाक्रम |
|---|---|
| 2011 | GNCTD कैबिनेट ने प्रोजेक्ट को सैद्धांतिक मंजूरी दी |
| 2013 | UTTIPEC की मीटिंग में मंजूरी |
| 2014 | दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन और यमुना समिति से स्वीकृति |
| 2015 | L&T को ठेका, 6 महीने में पूरा होना था (अप्रैल-अक्टूबर 2015) |
| 2023-24 | अब तक 87% काम ही पूरा, L&T ने मुआवजे के लिए तीन मध्यस्थता की |
| 2024 | कोर्ट ने ₹170.27 करोड़ अटैच कर दिए, भुगतान कोर्ट रजिस्ट्री में जमा |
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बारापुला फ्लाईओवर परियोजना सिर्फ एक अधूरी निर्माण योजना नहीं, बल्कि एक बड़े सिस्टमिक फेल्योर की गवाही है। LG द्वारा शुरू की गई ACB जांच इस बात की उम्मीद जगा रही है कि अब लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई होगी और भविष्य की परियोजनाएं अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ आगे बढ़ेंगी।









