लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेला गया भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट मुकाबला किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था। आखिरी समय तक जारी रहे इस संघर्ष में इंग्लैंड ने टीम इंडिया को 22 रनों से हराकर सीरीज में बढ़त बना ली है। भारत को जीत के लिए 193 रनों का लक्ष्य मिला था, लेकिन पूरी टीम 170 रन पर सिमट गई।
यह 2018 के बाद पहली बार है जब इंग्लैंड ने लॉर्ड्स में भारत को शिकस्त दी है। दोनों टीमों ने पहली पारी में 387-387 रन बनाकर मुकाबले को पूरी तरह संतुलित कर दिया था। हालांकि दूसरी पारी में इंग्लैंड महज 192 रन ही बना सका, लेकिन यह स्कोर भी भारत के लिए पहाड़ साबित हुआ।
बल्लेबाज़ी में दिखी कमजोरी
लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। यशस्वी जायसवाल बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। नंबर-3 पर आए करुण नायर भी बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे और सिर्फ 14 रन बनाकर आउट हो गए। कप्तान शुभमन गिल की दोनों पारियों में फ्लॉप शो ने टीम को बैकफुट पर ला दिया। उन्होंने पहली पारी में 16 और दूसरी में महज 6 रन बनाए।
जडेजा की जुझारू पारी
जब भारत का स्कोर 82/7 था, तब लग रहा था कि हार अब सिर्फ औपचारिकता है। लेकिन रवींद्र जडेजा ने मोर्चा संभालते हुए भारत की उम्मीदों को ज़िंदा रखा। उन्होंने 61 रनों की जुझारू पारी खेली और निचले क्रम के बल्लेबाज़ों के साथ मिलकर रन जोड़ने की कोशिश की। नितीश रेड्डी ने 13 रन बनाकर उनका थोड़ा साथ दिया, लेकिन यह साझेदारी लंबी नहीं चल सकी।
बुमराह और सिराज का संघर्ष
आठवें विकेट के गिरने के बाद जडेजा को जसप्रीत बुमराह और फिर मोहम्मद सिराज का साथ मिला। बुमराह ने आक्रामक रुख अपनाया, लेकिन एक बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में वह आउट हो गए। सिराज ने पूरी सावधानी से बल्लेबाज़ी की, लेकिन एक गेंद उनके बल्ले का किनारा लेते हुए सीधे स्टंप्स से जा टकराई और भारत की हार तय हो गई।
लॉर्ड्स का मैदान एक बार फिर साबित कर गया कि यहां रन चेज करना आसान नहीं होता। इंग्लैंड की गेंदबाज़ी ने निर्णायक भूमिका निभाई, खासकर दूसरी पारी में। भारत की बल्लेबाज़ी फिर एक बार दबाव में बिखर गई और एक आसान दिखने वाला लक्ष्य, असंभव बन गया।










