महाराष्ट्र में स्थानीय राजनीति को लेकर कांग्रेस ने सख्त रुख अपनाया है। बीजेपी को समर्थन देने के आरोप में कांग्रेस ने अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप पाटील को पार्टी से सस्पेंड कर दिया है। इस कार्रवाई से प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के उपाध्यक्ष गणेश पाटिल ने इस संबंध में प्रदीप पाटील को औपचारिक पत्र जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस ने अपने चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा और अंबरनाथ में 12 सीटों पर जीत हासिल की, लेकिन पार्टी नेतृत्व या प्रदेश कार्यालय को जानकारी दिए बिना बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया गया। पार्टी को इसकी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए मिली, जिसे अनुशासनहीनता माना गया।
पत्र में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के निर्देश पर यह निलंबन कार्रवाई की जा रही है। कांग्रेस नेतृत्व ने इसे पार्टी की नीति और सिद्धांतों के खिलाफ कदम बताया है।
नगर निकाय चुनाव के बाद बदले समीकरण
गौरतलब है कि हाल ही में हुए अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव के बाद बीजेपी ने कांग्रेस और अजित पवार गुट की एनसीपी के साथ मिलकर गठबंधन बनाया था। इस गठबंधन को ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ नाम दिया गया, जबकि बीजेपी की सहयोगी एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को इससे बाहर रखा गया। इसी तरह अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में भी बीजेपी ने AIMIM और कुछ अन्य दलों के साथ हाथ मिलाया था।
सीएम फडणवीस ने जताई नाराजगी
इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के गठबंधन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी के बिना किए गए हैं और यह पार्टी अनुशासन के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस या AIMIM के साथ किसी भी तरह का गठबंधन स्वीकार्य नहीं है और इसमें शामिल नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अंबरनाथ का राजनीतिक गणित
अंबरनाथ नगर परिषद में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसने 27 सीटें जीती थीं, लेकिन वह बहुमत से थोड़ा पीछे रह गई। इसके बाद बीजेपी की 14, कांग्रेस की 12 और एनसीपी की 4 सीटों को मिलाकर गठबंधन बना और बहुमत हासिल कर लिया गया। इस गठबंधन से बीजेपी की तेजश्री करंजुले पाटिल नगर परिषद की अध्यक्ष चुनी गईं।
यह भी पढ़ें: पटना नगर निगम: खुले में पेशाब और थूकने वाले होंगे ‘नगर शत्रु’
कुल मिलाकर, बीजेपी को समर्थन देने का फैसला कांग्रेस के स्थानीय नेता के लिए भारी पड़ गया और पार्टी ने साफ संदेश दे दिया है कि अनुशासन से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।









