महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव से पहले ही राजनीति ने दिलचस्प मोड़ ले लिया है। मतदान से पहले सत्ताधारी महायुति गठबंधन ने बड़ी बढ़त बना ली है। राज्य की 29 नगर निगमों में कुल 69 सीटों पर हुए नामांकन में से 68 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। इस प्रक्रिया में सबसे ज्यादा फायदा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को हुआ है, जिसके 44 उम्मीदवार बिना मुकाबले जीत गए।
2 जनवरी को नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख थी। इसके बाद यह तस्वीर साफ हुई कि विपक्ष कई जगह उम्मीदवार खड़ा करने में नाकाम रहा या बागी प्रत्याशियों के चलते मुकाबला ही नहीं हो सका।
नामांकन वापसी के दौरान दिखा सियासी तनाव
नामांकन वापसी की प्रक्रिया के दौरान महाराष्ट्र के कई शहरों में राजनीतिक खींचतान और तनावपूर्ण हालात देखने को मिले। सत्ताधारी दलों ने अपने-अपने बागी उम्मीदवारों को मनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। नासिक से लेकर सोलापुर, मुंबई से नागपुर तक बैठकों, बातचीत और दबाव की राजनीति चलती रही।
सोलापुर में हालात सबसे ज्यादा बिगड़े, जहां बीजेपी के दो गुटों के बीच कथित झड़प हो गई। इस घटना में एक पार्टी कार्यकर्ता की मौत की खबर सामने आई, जिसके बाद इलाके में पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
बागियों की नाराजगी बनी निर्विरोध जीत की वजह
नासिक में बाहरी उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने से नाराज बीजेपी कार्यकर्ताओं ने खुलकर विरोध किया। नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस भी हुई। मुंबई में पार्टी नेतृत्व की तमाम कोशिशों के बावजूद वार्ड 60, 173, 177, 180 और 205 से बीजेपी के पांच बागी उम्मीदवार नाम वापस लेने को तैयार नहीं हुए।
वहीं, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की ओर से भी बागियों को मनाने की कोशिशें पूरी तरह सफल नहीं हो सकीं। करीब नौ वार्डों में दोनों दलों को बागी प्रत्याशियों का सामना करना पड़ा।
भिवंडी में ठाकरे गुटों के बीच गठबंधन टूट गया और दोनों ओर से एक-दूसरे के खिलाफ नामांकन दाखिल कर दिए गए। पनवेल में महा विकास अघाड़ी के सात उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिए, जिससे वहां बीजेपी के प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए।
नागपुर में बीजेपी के बागी किसान गावंडे को लेकर भी नाटकीय स्थिति बनी। कथित तौर पर समर्थकों ने उन्हें घर में ही रोक लिया, जिसके बाद उन्होंने पार्टी के फैसले का पालन करने की अपील की। कांग्रेस में भी विकास ठाकरे और नितिन राउत दिनभर बागियों को मनाने में जुटे रहे।
बीजेपी को सबसे ज्यादा फायदा
छत्रपति संभाजीनगर में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने बाहरी उम्मीदवारों को तरजीह देने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। कई बागियों ने नाम वापस ले लिया, लेकिन वार्ड नंबर 2 से प्रशांत भदाणे-पाटिल मैदान में डटे रहे।
जांच के बाद सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, 29 नगर निगमों में कुल 69 सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज हुई। इनमें बीजेपी के 44, शिवसेना के 22, अजित पवार गुट की एनसीपी के 2 और एक सीट इस्लामिक पार्टी के खाते में गई है।
कल्याण में सबसे ज्यादा निर्विरोध सीटें
नगर निगमों के हिसाब से देखें तो बीजेपी ने कल्याण में सबसे ज्यादा 15 सीटें निर्विरोध जीतीं। इसके अलावा भिवंडी, पनवेल और जलगांव में पार्टी को छह-छह सीटें मिलीं। शिवसेना ने ठाणे और कल्याण में सात-सात जबकि जलगांव में छह सीटें अपने नाम कीं। अजित पवार गुट की एनसीपी को जलगांव में दो और इस्लामिक पार्टी को मालेगांव में एक सीट मिली।
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बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) सहित सभी नगर निगमों के लिए मतदान 15 जनवरी को होना है, लेकिन उससे पहले ही निर्विरोध जीत ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।









