दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में हालात तेजी से गंभीर होते नजर आ रहे हैं। राजधानी काराकास समेत देश के सात अलग-अलग इलाकों में हवाई हमलों की खबर सामने आई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कम से कम चार शहरों में रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। वेनेजुएला सरकार ने इन हमलों के लिए अमेरिका पर आरोप लगाया है।
इन घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव इतना क्यों बढ़ गया है, और क्या इन हमलों के पीछे असली वजह तेल है?
कभी मजबूत थे अमेरिका-वेनेजुएला के रिश्ते
एक समय था जब अमेरिका वेनेजुएला से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता था। फरवरी 2021 में आई यूनाइटेड स्टेट्स गवर्नमेंट अकाउंटबिलिटी ऑफिस की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2018 में अमेरिका हर दिन करीब 5 लाख बैरल वेनेजुएला का कच्चा तेल खरीदता था। यह अमेरिका के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 6.5 प्रतिशत था। वेनेजुएला का हैवी क्रूड ऑयल अमेरिकी रिफाइनरियों के लिए काफी अहम माना जाता था।
अचानक क्यों बदले हालात?
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला पर सख्त रुख अपनाने के पीछे कई वजहें गिनाईं। अमेरिका का आरोप रहा है कि वेनेजुएला से ड्रग्स की तस्करी बड़े पैमाने पर अमेरिका में हो रही है और अवैध प्रवासियों की एंट्री भी बढ़ी है। इसके अलावा, मादुरो सरकार के सत्ता में आने के बाद वेनेजुएला में लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होने का दावा भी अमेरिका करता रहा है।
इन कारणों के चलते अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल उद्योग पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए। अमेरिकी प्रशासन ने साफ कहा कि वह तेल को राजनीतिक दबाव के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करेगा।
PDVSA पर गिरे प्रतिबंधों की मार
2017 से 2019 के बीच अमेरिका ने वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए। अमेरिकी कंपनियों को भी वेनेजुएला से तेल न खरीदने के निर्देश दिए गए। नतीजा यह हुआ कि 2018 में जहां अमेरिका वेनेजुएला से रोजाना लाखों बैरल तेल खरीद रहा था, वहीं 2020 तक यह आयात पूरी तरह शून्य हो गया।
चीन और रूस की ओर झुका वेनेजुएला
अमेरिका से तेल निर्यात बंद होने के बाद वेनेजुएला ने चीन, रूस और ईरान जैसे देशों की ओर रुख किया। इन देशों को रियायती दरों पर तेल बेचा गया। जानकारों का मानना है कि इसी कदम ने अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्तों में और ज्यादा कड़वाहट घोल दी।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पहले ही आरोप लगा चुके हैं कि अमेरिका उनके देश के तेल संसाधनों पर पूरा नियंत्रण चाहता है और इसी वजह से लगातार दबाव बना रहा है।
ड्रग्स के आरोप और सैन्य कार्रवाई
अमेरिका लंबे समय से वेनेजुएला पर ड्रग्स तस्करी को बढ़ावा देने के आरोप लगाता रहा है। 2018 में कई वेनेजुएला के वरिष्ठ अधिकारियों को नार्को-ट्रैफिकिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में प्रतिबंधित सूची में डाला गया। मार्च 2020 में मादुरो समेत कई शीर्ष नेताओं के खिलाफ आरोप तय किए गए।
हाल के वर्षों में तनाव और बढ़ा है। सितंबर 2025 में अमेरिका ने वेनेजुएला के पास एक जहाज को निशाना बनाया, जिसे ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़ा बताया गया। वहीं दिसंबर 2025 में एक डॉक क्षेत्र पर ड्रोन हमले की खबर आई, जिसे अमेरिका ने ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई बताया।
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तेल, सत्ता और प्रभाव की जंग
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-वेनेजुएला तनाव सिर्फ ड्रग्स या लोकतंत्र तक सीमित नहीं है। असली लड़ाई तेल, उसकी सप्लाई और वैश्विक प्रभाव को लेकर है। ताजा हवाई हमलों की खबरों ने इस संघर्ष को और खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के रिश्ते किस दिशा में जाते हैं।









