महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को कैबिनेट स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता माणिकराव कोकाटे से कृषि मंत्रालय का कार्यभार वापस ले लिया है। उनकी जगह एनसीपी के ही नेता दत्तात्रेय भरणे को नया कृषि मंत्री नियुक्त किया गया है। अब कोकाटे को खेल और युवा कल्याण मंत्रालय सौंपा गया है, जो पहले भरणे के पास था।
यह बदलाव तब सामने आया जब हाल ही में महाराष्ट्र विधानसभा सत्र के दौरान कोकाटे का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे मोबाइल फोन पर ऑनलाइन ‘जंगली रम्मी’ गेम खेलते नजर आए। वीडियो को एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने सोशल मीडिया पर साझा किया था। इसके बाद विपक्ष ने कोकाटे पर निशाना साधते हुए उन्हें बर्खास्त करने की मांग तेज कर दी थी।
हालांकि, कोकाटे ने शुरू में इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि वे केवल एक पॉप-अप नोटिफिकेशन को बंद कर रहे थे और कोई गेम नहीं खेल रहे थे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि झूठे आरोप लगाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन विधानसभा सचिवालय द्वारा की गई आंतरिक जांच में पुष्टि हुई कि कोकाटे वास्तव में ‘जंगली रम्मी’ खेल रहे थे।
इस विवाद ने सरकार को असहज स्थिति में डाल दिया था, खासकर ऐसे समय में जब राज्य के कई हिस्से गंभीर कृषि संकट से जूझ रहे हैं। विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब किसान आत्महत्या और सूखे की मार झेल रहे हैं, तब कृषि मंत्री का ऐसा गैर-जिम्मेदाराना आचरण बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बीच हुई बैठक के बाद निर्णय लिया गया कि कोकाटे से कृषि मंत्रालय वापस लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, अजित पवार ने कोकाटे को भविष्य में अनुशासन बनाए रखने की सख्त चेतावनी दी है। कोकाटे ने भी reportedly माफी मांगते हुए भरोसा दिलाया है कि वे आगे से ऐसी गलती नहीं दोहराएंगे।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब माणिकराव कोकाटे विवादों में घिरे हैं। इससे पहले वे किसानों की तुलना भिखारियों से करने के बयान को लेकर आलोचना का सामना कर चुके हैं। इसके अलावा, 1995 के एक आवासीय घोटाले में भी उन्हें दोषी ठहराया गया था, हालांकि बाद में कोर्ट से उन्हें राहत मिल गई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कैबिनेट फेरबदल न केवल सरकार की छवि सुधारने का प्रयास है, बल्कि एनडीए गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने की रणनीति भी है। सहयोगी दल शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी हाल ही में विवादित मंत्रियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की थी।
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इस घटनाक्रम ने एक बार फिर राज्य में जवाबदेही और राजनीतिक शुचिता को लेकर बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि यह बदलाव सरकार की साख को कितनी मजबूती दे पाता है।









