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Home भारत

अग्निवीर योजना में हो सकता है बड़ा बदलाव, स्थायी भर्ती की सीमा बढ़ाने पर विचार

भारतीय थलसेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना की ओर से अग्निवीर योजना में बड़े बदलाव की मांग सामने आई है।

Gautam Rishi by Gautam Rishi
6 July 2026
in भारत
0
अग्निवीर योजना में हो सकता है बड़ा बदलाव, स्थायी भर्ती की सीमा बढ़ाने पर विचार - Panchayati Times

अग्निवीर योजना

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भारतीय थलसेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना की ओर से अग्निवीर योजना में बड़े बदलाव की मांग सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तीनों सेनाएं अब चार साल की सेवा के बाद स्थायी भर्ती के लिए तय 25 प्रतिशत सीमा को बढ़ाने के पक्ष में हैं। इस प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय स्तर पर चर्चा चल रही है और आने वाले समय में इससे जुड़ा बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

क्या है अग्निवीर योजना?

अग्निपथ योजना की शुरुआत वर्ष 2022 में की गई थी। इस योजना के तहत 17.5 से 21 वर्ष के युवाओं को सेना में चार साल के लिए भर्ती किया जाता है। भर्ती होने वाले जवानों को ‘अग्निवीर’ कहा जाता है।

चार साल की सेवा पूरी होने के बाद केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को मेरिट, मेडिकल फिटनेस और सेना की जरूरतों के आधार पर स्थायी सेवा में शामिल किया जाता है। बाकी जवानों को सेवा निधि पैकेज देकर सेवा से मुक्त किया जाता है।

सरकार का उद्देश्य सेना की औसत आयु कम करना, आधुनिक तकनीक पर निवेश बढ़ाना और पेंशन खर्च को नियंत्रित करना था।

अब क्या बदलाव चाहती हैं तीनों सेनाएं?

मौजूदा नियमों के तहत स्थायी भर्ती की सीमा अधिकतम 25 प्रतिशत तय है, लेकिन अब तीनों सेनाएं इसे बढ़ाने की मांग कर रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक:

  • भारतीय नौसेना करीब 75 प्रतिशत अग्निवीरों को स्थायी रखने के पक्ष में है।
  • भारतीय थलसेना और भारतीय वायुसेना लगभग 50 प्रतिशत तक रिटेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव दे रही हैं।

हालांकि इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

सेनाएं सीमा बढ़ाने की मांग क्यों कर रही हैं?

1. तकनीकी ट्रेनिंग में ज्यादा समय

सेना का मानना है कि कई तकनीकी और आधुनिक सैन्य पदों पर जवानों को पूरी तरह प्रशिक्षित करने में चार साल से ज्यादा समय लगता है। खासकर नौसेना में कई सिस्टम इतने एडवांस हैं कि जवानों को ऑपरेशनल स्तर तक पहुंचने में कई साल लग जाते हैं।

2. नई तकनीक और आधुनिक हथियार

हाल के वर्षों में सेना ने कई आधुनिक हथियार और तकनीकी प्लेटफॉर्म शामिल किए हैं। इन सिस्टम्स को प्रभावी तरीके से चलाने के लिए अनुभवी और लंबे समय तक सेवा देने वाले जवानों की जरूरत महसूस की जा रही है।

3. ऑपरेशनल अनुभव का महत्व

सैन्य अधिकारियों का मानना है कि वास्तविक ऑपरेशन और फील्ड अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता। लगातार ट्रेनिंग और कई तैनातियों के बाद जवानों की कार्यक्षमता और प्रतिक्रिया क्षमता बेहतर होती है।

4. जवानों की कमी की चुनौती

रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना में वर्तमान समय में बड़ी संख्या में जवानों की कमी बनी हुई है। ऐसे में अधिक प्रशिक्षित अग्निवीरों को लंबे समय तक सेवा में बनाए रखना सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

अग्निवीरों और परिवारों के लिए भी हो सकते हैं नए फैसले

सरकार कुछ अतिरिक्त सुविधाओं पर भी विचार कर रही है। इनमें ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले अग्निवीरों के परिवारों को दीर्घकालिक आर्थिक सहायता और सेवा के दौरान घायल या विकलांग होने वाले जवानों को आजीवन चिकित्सा सुविधा देने जैसे प्रस्ताव शामिल बताए जा रहे हैं।

इन कदमों का उद्देश्य योजना को लेकर उठ रही चिंताओं को कम करना और जवानों के परिवारों को अधिक सुरक्षा प्रदान करना है।

बदलाव का क्या हो सकता है असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थायी भर्ती की सीमा बढ़ती है तो सेना को ज्यादा अनुभवी जवान मिल सकेंगे, जिससे ऑपरेशनल क्षमता मजबूत होगी।

दूसरी ओर, अधिक जवानों को स्थायी सेवा में रखने से सरकार पर भविष्य में पेंशन और वेतन का बोझ बढ़ सकता है। साथ ही नई भर्तियों में सीटों की संख्या भी प्रभावित हो सकती है।

हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक युद्ध और तकनीकी चुनौतियों को देखते हुए अनुभवी सैन्य बल बनाए रखना देश की सुरक्षा के लिए जरूरी हो सकता है।

यह भी पढ़ें: बांकीपुर सीट पर महागठबंधन में बढ़ी खींचतान, RJD और कांग्रेस दोनों ने ठोका दावा

अब सभी की नजर रक्षा मंत्रालय के अंतिम फैसले पर टिकी है, क्योंकि यह बदलाव लाखों युवाओं और देश की सैन्य व्यवस्था दोनों पर बड़ा असर डाल सकता है।

Tags: अग्निवीर योजना
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