पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले सियासी हलचल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले में किसी अतिरिक्त निर्देश की आवश्यकता नहीं है। साथ ही, कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) के आश्वासन को रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया।
केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती पर कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मतगणना के लिए कर्मचारियों का चयन केवल एक स्रोत, यानी केंद्र सरकार से करना नियमों के खिलाफ नहीं है। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग का 13 अप्रैल वाला परिपत्र वैध है और इसमें कोई त्रुटि नहीं पाई गई। कोर्ट ने यह भी भरोसा जताया कि मतगणना के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी।
टीएमसी की आपत्ति
टीएमसी ने अदालत में तर्क दिया कि आयोग ने संभावित गड़बड़ी की आशंका जताई है, लेकिन उसके आधार स्पष्ट नहीं किए गए। पार्टी ने यह भी कहा कि संबंधित परिपत्र की जानकारी उन्हें काफी देर से मिली, जिससे संदेह और बढ़ा।
मतगणना से पहले कानूनी लड़ाई
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित होने हैं। इससे पहले टीएमसी ने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। मामला मतगणना केंद्रों पर केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) के कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ा था।
कोर्ट ने नियमों का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि नियमों के अनुसार मतगणना कर्मियों की नियुक्ति राज्य या केंद्र, दोनों स्रोतों से की जा सकती है। इसलिए केवल केंद्रीय कर्मचारियों की मौजूदगी को गलत नहीं ठहराया जा सकता।
चुनाव आयोग का आश्वासन
चुनाव आयोग ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वह अपने दिशा-निर्देशों को पूरी निष्ठा के साथ लागू करेगा। इसके बाद अदालत ने इस मामले में आगे कोई आदेश देने से इनकार कर दिया।
सिब्बल ने उठाए सवाल
टीएमसी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। हालांकि, अदालत ने उनकी दलीलों से सहमति नहीं जताई और कहा कि नियमों की व्याख्या वैसी नहीं है जैसी प्रस्तुत की जा रही है।
विवाद की जड़
दरअसल, चुनाव आयोग ने हाल ही में निर्देश जारी किया था कि हर मतगणना टेबल पर सुपरवाइजर या सहायक में से कम से कम एक कर्मचारी केंद्र सरकार या पीएसयू से होना चाहिए। टीएमसी को आशंका है कि इससे निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है, जबकि अदालत और हाई कोर्ट दोनों ने इस तर्क को खारिज कर दिया है।
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इस फैसले के साथ ही मतगणना प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद पर फिलहाल विराम लग गया है, और अब सभी की नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं।









