प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 13 सितंबर को प्रस्तावित मणिपुर यात्रा से पहले राज्य में एक बार फिर तनाव गहराने लगा है। इसका कारण है यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) द्वारा नागा बहुल क्षेत्रों में व्यापार प्रतिबंध (ट्रेड एम्बार्गो) लागू करने की घोषणा। यह प्रतिबंध 8 सितंबर की मध्यरात्रि से प्रभावी होगा। UNC ने यह कदम केंद्र सरकार द्वारा फ्री मूवमेंट रेजीम (FMR) को रद्द किए जाने और भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़बंदी के फैसले के विरोधस्वरूप उठाया है।
UNC ने बातचीत विफल होने के बाद उठाया कदम
सूत्रों के अनुसार, UNC और केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के बीच पिछले महीने दिल्ली में हुई वार्ता बिना किसी समाधान के समाप्त हो गई। वार्ता के दौरान UNC प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से अपील की थी कि वह FMR को बहाल करे, क्योंकि यह सीमा पार रहने वाले नागा समुदायों के बीच सांस्कृतिक, पारिवारिक और व्यापारिक संबंधों को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। हालांकि, गृह मंत्रालय ने FMR को सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए इसे बनाए रखने से इनकार कर दिया।
क्या है FMR और क्यों है इसका विरोध?
फ्री मूवमेंट रेजीम (FMR) की शुरुआत 2018 में हुई थी, जिसके तहत भारत-म्यांमार सीमा के दोनों ओर रहने वाले आदिवासी समुदायों को 16 किलोमीटर तक वीजा के बिना आवाजाही की अनुमति थी। इसका उद्देश्य पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को बनाए रखना था। लेकिन इस साल की शुरुआत में इसे अचानक समाप्त कर दिया गया और अब सरकार द्वारा सीमा पर बाड़ लगाने का काम शुरू किए जाने की खबरों ने UNC और नागा संगठनों को और नाराज़ कर दिया है।
विरोध करने वालों का कहना है कि यह बाड़बंदी नागा गांवों को कृत्रिम रूप से विभाजित कर देगी और उनके सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को समाप्त कर देगी।

UNC का बयान: “यह हमारी पहचान और ज़मीन की रक्षा है”
UNC ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा है, “FMR को एकतरफा तरीके से रद्द करना और नागा मातृभूमि के बीच सीमा बाड़ लगाना अस्वीकार्य है। यह व्यापार प्रतिबंध हमारी मातृभूमि, पहचान और ज़मीन पर अधिकार की सामूहिक रक्षा का प्रतीक है।”
जनजीवन पर असर की आशंका
इस प्रतिबंध के चलते नागा बहुल क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो सकती है। इन क्षेत्रों की आपूर्ति मुख्यतः राजमार्गों पर निर्भर है। पहले भी मणिपुर में ऐसे प्रतिबंधों के कारण वस्तुओं की भारी किल्लत और कीमतों में वृद्धि देखी जा चुकी है।
UNC ने नागा समुदायों से पूर्ण सहयोग और एकजुटता की अपील की है, वहीं राज्य की अन्य जनता से धैर्य और समझदारी दिखाने की गुजारिश की है।
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सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
राज्य में पहले से ही जातीय तनाव के हालात बने हुए हैं, और अब UNC का यह प्रतिबंध प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान नई असुरक्षा और अस्थिरता को जन्म दे सकता है। सुरक्षा बलों को आशंका है कि यह कदम विभिन्न समुदायों के बीच विरोध और टकराव को बढ़ावा दे सकता है।









