बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और निर्देशक मनोज कुमार का मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में निधन हो गया है। मनोज कुमार लंबे समय से बीमार चल रहे थे और बीमारी के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन ने भारतीय सिनेमा के एक सुनहरे युग का अंत कर दिया है। इस दुखद समाचार के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बॉलीवुड के अनेक सितारे उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
मनोज कुमार का फिल्मी सफर और योगदान
अभिनेता मनोज कुमार का असली नाम हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी था, लेकिन वे फिल्म इंडस्ट्री में मनोज कुमार के नाम से मशहूर हुए। उनकी देशभक्ति पर आधारित फिल्मों के कारण उन्हें “भारत कुमार” का खिताब भी मिला। वे न केवल एक शानदार अभिनेता थे, बल्कि एक सफल निर्देशक और स्क्रीनराइटर भी थे। उनकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की और दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी।
मनोज कुमार की नेट वर्थ
सेलिब्रिटी नेट वर्थ की रिपोर्ट के अनुसार, मनोज कुमार की नेट वर्थ 170 करोड़ रुपये थी। यह संपत्ति उनके सफल फिल्मी करियर और फिल्म इंडस्ट्री में उनके योगदान का परिणाम है। उनकी बनाई गई फिल्में न केवल व्यावसायिक रूप से सफल रही, बल्कि समाज में देशभक्ति और प्रेरणा का संदेश भी फैलाती रही।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोस्वामी टावर नामक एक बड़ी बिल्डिंग भी उनके नाम पर है, जो उनके व्यावसायिक और व्यक्तिगत उपलब्धियों का प्रतीक है।
मनोज कुमार की प्रमुख हिट फिल्में
मनोज कुमार ने अपने करियर में कई सुपरहिट फिल्में दी हैं, जिन्होंने भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपनी जगह बनाई है। इनमें से कुछ प्रमुख फिल्में हैं:
- हरियाली और रास्ता
- वो कौन थी
- हिमालय की गोद में
- शहीद
- उपकार
- रोटी कपड़ा और मकान
- क्रांति
इन फिल्मों ने न केवल दर्शकों को मनोरंजन दिया, बल्कि देशभक्ति की भावना को भी जागृत किया।
पुरस्कार और सम्मान
मनोज कुमार को उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया है:
- पद्मश्री (1992): भारतीय सिनेमा में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए
- फिल्मफेयर अवॉर्ड: फिल्म उपकार, रोटी कपड़ा और मकान के लिए
- दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड (2015): भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के सम्मान में
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मनोज कुमार का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ा क्षति है। उनकी फिल्में, विचारधारा, और देशभक्ति की भावना हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी। उनकी विरासत भारतीय फिल्म उद्योग को प्रेरित करती रहेगी।