ग्रामीण भारत को आर्थिक मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। लंबे समय से देश की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना रही मनरेगा को अब नए नाम और नए स्वरूप में लागू करने का फैसला किया गया है। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस योजना का नाम बदलकर पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना रखने को मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही योजना के लाभों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
सरकार के इस फैसले का सीधा फायदा उन करोड़ों ग्रामीण परिवारों को मिलेगा, जिनकी आजीविका का बड़ा आधार यह योजना रही है। बढ़ती महंगाई और रोजगार की अनिश्चितता के बीच सरकार ने ग्रामीण रोजगार को ज्यादा सुरक्षित और स्थायी बनाने पर जोर दिया है।
रोजगार के दिन और मजदूरी दोनों में बढ़ोतरी
नई योजना के तहत सबसे बड़ा बदलाव गारंटीकृत रोजगार के दिनों में किया गया है। अब ग्रामीण परिवारों को साल में 100 नहीं बल्कि 125 दिन का सुनिश्चित काम मिलेगा। इसके अलावा मजदूरी दर को भी बढ़ाकर 240 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है, जिससे दैनिक आय में सीधा इजाफा होगा।
सरकार का मानना है कि ज्यादा काम और बेहतर मजदूरी से गांवों में खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी। इसका असर स्थानीय बाजार, छोटे व्यापार, कृषि गतिविधियों और ग्रामीण सेवाओं पर सकारात्मक रूप से दिखाई देगा।
मनरेगा से पूज्य बापू योजना तक का सफर
ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की शुरुआत साल 2005 में नरेगा के रूप में हुई थी, जिसे बाद में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा नाम दिया गया। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में काम के अधिकार को कानूनी सुरक्षा देना था।
योजना के तहत सड़क निर्माण, जल संरक्षण, तालाब खुदाई, बागवानी और सामुदायिक विकास जैसे कार्य कराए जाते रहे हैं। इससे न केवल ग्रामीण आय को सहारा मिला, बल्कि पलायन पर रोक, महिलाओं की भागीदारी और संकट के समय गांवों की सुरक्षा में भी यह योजना अहम साबित हुई।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना के जरिए सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण मजदूर केवल सहायता पर निर्भर न रहें, बल्कि नियमित रोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बनें। बढ़े हुए काम के दिन और मजदूरी ग्रामीण जीवन स्तर को सुधारने के साथ-साथ देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने में मदद करेंगे।
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सरकार का कहना है कि आने वाले समय में इस योजना के तहत काम की गुणवत्ता, भुगतान व्यवस्था और निगरानी तंत्र को भी और मजबूत किया जाएगा, ताकि इसका लाभ सही लोगों तक पहुंचे।









