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Online Gaming: ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को सरकार GST डिमांड में दे सकती है बड़ी राहत, IFIE के कॉन्क्लेव के बाद हो सकता है ये बदलाव

ये फैसला तब आया है जब कुछ दिन पहले इंटरैक्टिव फोरम ऑन इंडियन इकोनॉमी (IFIE) द्वारा मुंबई में इस विषय पर एक कॉन्क्लेव किया गया था। जो “मोदी का दृष्टिकोण: भारत 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर” विषय पर था। जिसमें देश की अर्थव्यवस्था में “ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री” किस तरह अपना योगदान दे सकती है, इस पर विस्तृत चर्चा की गई और कई विद्वानों ने इस पर अपने विचार रखे।

Kiran rautela by Kiran rautela
8 February 2024
in IFIE, बिज़नेस, भारत
0
Online Gaming: ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को सरकार GST डिमांड में दे सकती है बड़ी राहत, IFIE के कॉन्क्लेव के बाद हो सकता है ये बदलाव
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केंद्र सरकार ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को जारी किए गए रेट्रो गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) डिमांड नोटिस पर अपना रुख बदलने का सोच रही है। ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को सरकार की ओर से बड़ी राहत मिल सकती है और GST डिमांड नोटिस पर नरम रुख अपना सकती है।
और ये फैसला तब आया है जब कुछ दिन पहले इंटरैक्टिव फोरम ऑन इंडियन इकोनॉमी (IFIE) द्वारा मुंबई में इस विषय पर एक कॉन्क्लेव किया गया था। जो “मोदी का दृष्टिकोण: भारत 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर” विषय पर था। जिसमें देश की अर्थव्यवस्था में “ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री” किस तरह अपना योगदान दे सकती है, इस पर विस्तृत चर्चा की गई और कई विद्वानों ने इस पर अपने विचार रखे।
बता दें कि, सरकार ने जुलाई 2017 से मार्च 2023 के बीच ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के लिए जीएसटी डिमांड नोटिस जारी किया था। अब इसमें कुछ राहत मिलने के संकेत मिल रहे हैं। ये भी माना जा रहा है कि इस मामले में सरकार कानूनी सलाह ले सकती है।
बताते चलें कि जीएसटी डिमांड नोटिस के चलते ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों का अस्तित्व खतरे में आ गया है। लेकिन सरकार अब कुछ ढील देने के विचार में है।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति केजी बालाकृष्णन ने क्या कहा..
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति केजी बालाकृष्णन ने इस पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा- देश ही नहीं विदेशों में भी ऑनलाइन गेमिंग का क्रेज है। भारत में गेमिंग, टेक्नोलॉजी के नाम पर एक रत्न है। ये सिर्फ कार्ड खेलना या फोटो देखना नहीं है बल्कि ये इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी का बेहतरीन उदाहरण है।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति केजी बालाकृष्णन
पूर्व मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति केजी बालाकृष्णन

इस तरह के गेम में कंट्रोल किया जा सकता है, जिससे कि ये ‘गेम ऑफ चांस’ ना बने, जिसमें लोग बड़ी आसानी से अपना पैसा खो देते हैं। इस तरह के फ्रॉड को रोकने के लिए एक स्व-नियामक निकाय (Self Regulatory Body) और नियम का होना जरूरी है।

Former Chief Justice K.G. Balakrishnan Advocates Regulation for Online Gaming Industry, Believes It Can Contribute to India’s Economical Growth #KGBalakrishnan #Justice_KGBalakrishnan #OnlineGamingIndustry #EconomicalGrowth #India #SOGFederationhttps://t.co/tK7zPSoJAv

— POWER CORRIDORS (@power_corridors) February 6, 2024

क्या बोलीं सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा
इंटरैक्टिव फोरम ऑन इंडियन इकोनॉमी के कॉन्क्लेव में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा ने कहा कि ये विषय ऐसा है जिसके बारे में लोगों को अधिक जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इंडियन इकोनॉमी को आगे बढ़ाने के लिए ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्रीज समेत हर क्षेत्र के लोगों को इसमें शामिल होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा
उन्होंने कहा कि आगे की जनरेशन को गैंबलिंग की आदत ना लगे और उस जनरेशन को बचाते हुए स्किल पर ध्यान देना होगा और इस संस्था को बहुत बड़ी जिम्मेदारी निभानी होगी। न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा ने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री के लिए जो सेल्फ रेगुलेटरी बॉडी बनेगी उसमें आईटी, लीगल एक्सपर्ट और लॉ फॉर्म हो जिससे कि रेगुलेट करने में आसानी होगी।

डॉ देबी प्रसाद दाश ने क्या कहा?
डॉ देबी प्रसाद दाश (यमन पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विशेषज्ञों के पैनल के समन्वयक एवं सदस्य (वित्त), भारत सरकार में भारतीय सीमा शुल्क (डीआरआई) के प्रधान महानिदेशक, जीएसटी इंटेलिजेंस के महानिदेशक, पूर्व अधिकारी सीबीआई और आरबीआई) ने अपनी बात रखी।
डॉ देबी प्रसाद दाश (पूर्व प्रिंसिपल डीजी, डीआरआई और डीजी जीएसटी इंटेलिजेंस)
डॉ देबी प्रसाद दाश (पूर्व प्रिंसिपल डीजी, डीआरआई और डीजी जीएसटी इंटेलिजेंस)
उन्होंने कहा कि उद्योग के अगले विकास चरण तक पहुंचने के लिए संघीय स्तर पर एक यूनीफॉर्म रेगुलेशन आवश्यक है।
आगे उन्होंने कहा- हाल ही में 11 जुलाई, 2023 को 50वीं जीएसटी परिषद की बैठक संपन्न हुई। जिसमें मंत्रियों के समूह (जीओएम) ने सिफारिश की है कि ऑनलाइन गेमिंग पर 28 प्रतिशत की एक समान दर से कर लगाया जाना चाहिए। जिसका अर्थ है कि कर की गणना दांव पर लगाए गए पैसे की राशि पर की जाएगी, भले ही दांव जीतता हो या हारता हो।
मनी लॉन्ड्रिंग और गेमिंग की बढ़ती लत की घटनाओं के बाद रेगुलेशन की आवश्यकता हुई। भारत दुनिया के चार सबसे बड़े गेमिंग बाजारों में से एक है। गेमिंग उद्योग ने इस कदम का स्वागत किया क्योंकि रेगुलेशन निश्चितता इसे वैधता प्रदान करेगी।

भारत सरकार के पूर्व सचिव ने कही बड़ी बात
भारत सरकार के पूर्व सचिव शंकर अग्रवाल ने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री पूरी दुनिया में 200 बिलीयन यूएस डॉलर का है जिसमें केवल 1.50 बिलियन डॉलर का काम हिंदुस्तान में हो रहा है। सबसे अच्छी आईटी के ब्रेन इंडिया में है। अगर हम इसको अच्छे से उपयोग करे तो हम आसानी से डेढ़ सौ बिलियन डॉलर का जो इंडस्ट्री है।
भारत सरकार के पूर्व सचिव शंकर अग्रवाल
भारत सरकार के पूर्व सचिव, शंकर अग्रवाल
उसको 50 बिलियन यूएस डॉलर तक पहुंचा सकते हैं। इसमें केवल एक ही समस्या है कि एक सेल्फ रेगुलेटरी रेजिम नहीं तो उसको अगर बना दिया जाए तो लोगों के मन में जो आशंकाएं होगी वह मिट जाएगी। अधिकांश समय यह ऑनलाइन गेमिंग जुआ के साथ जुड़ जाता है।

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