Piyush Pandey passed away: विज्ञापन जगत के दिग्गज पियूष पांडे का शुक्रवार को निधन हो गया। फेवीकोल, कैडबरी और एशियन पेंट्स जैसे मशहूर विज्ञापनों के रचयिता पियूष पांडे 70 वर्ष के थे। वे कुछ समय से संक्रमण से पीड़ित थे। उनका अंतिम संस्कार शनिवार को किया जाएगा।
भारतीय विज्ञापन जगत की आवाज़
पियूष पांडे लगभग चार दशकों से विज्ञापन उद्योग में सक्रिय थे। वे ओगिल्वी (Ogilvy) के ग्लोबल चीफ क्रिएटिव ऑफिसर और एक्ज़ीक्यूटिव चेयरमैन (इंडिया) थे।
एड जगत के गुरु
पियूष पांडे ने 2014 में ‘अबकी बार मोदी सरकार का नारा दिया था और ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ गाना भी उन्होंने ही लिखा था।
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उनके नेतृत्व में ओगिल्वी इंडिया लगातार 12 साल तक एजेंसी रेकनर में नंबर 1 एजेंसी रही। पियूष पांडे को 2016 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
अभिनय की दुनिया में भी कदम
विज्ञापन जगत के अलावा पियूष पांडे ने अभिनय में भी हाथ आज़माया। वे 2013 में जॉन अब्राहम की फिल्म ‘मद्रास कैफे’ में नज़र आए थे। इसके अलावा उन्होंने ICICI बैंक के मैजिक पेंसिल प्रोजेक्ट के लिए भी काम किया।
वह मिले सुर मेरा तुम्हारा जैसे प्रतिष्ठित गीत के गीतकार भी थे, जो भारत की एकता और विविधता का प्रतीक है।
उन्होंने फिल्म भोपाल एक्सप्रेस की पटकथा सह-लेखन में भी योगदान दिया था।
श्रद्धांजलियां
व्यापार, विज्ञापन और राजनीति जगत से पियूष पांडे को श्रद्धांजलियां दी जा रही हैं।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, ‘भारतीय विज्ञापन जगत के एक महानायक और दिग्गज, उन्होंने संवाद को आम बोलचाल की भाषा, देसी हास्य और आत्मीयता से भर दिया। उनके साथ कई मौकों पर बातचीत का सौभाग्य मिला। उनके परिवार, मित्रों और रचनात्मक समुदाय के प्रति हार्दिक संवेदनाएं। उनका विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।’
कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने लिखा, ‘दुख है कि पियूष पांडे अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने 2003 में कोटक महिंद्रा बैंक का लॉन्च ‘कॉमन सेंस’ कैंपेन से किया था। वे अद्भुत सोच वाले, सादगीपूर्ण और भारतीय जड़ों से जुड़े व्यक्ति थे। उनकी बहुत कमी खलेगी।’
लेखक और कॉलमनिस्ट सुहेल सेठ ने उन्हें अपना प्रिय मित्र बताते हुए कहा, ‘भारत ने सिर्फ एक महान विज्ञापन मस्तिष्क नहीं, बल्कि एक सच्चे देशभक्त और सज्जन व्यक्ति को खो दिया है। अब स्वर्ग में ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ गूंजेगा।’
पियूष पांडे न सिर्फ विज्ञापन की दुनिया के दिग्गज थे, बल्कि उन्होंने भारत की आवाज़ को विज्ञापनों और शब्दों के ज़रिए लोगों के दिलों तक पहुंचाया।









