देशभर में शुक्रवार से पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी लागू हो गई है. केंद्र सरकार की ओर से पेट्रोल के दाम में 3.14 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3.11 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है. वहीं सीएनजी की कीमत भी 2 रुपये प्रति किलो बढ़ा दी गई है. नई दरें लागू होने के बाद आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है.
राजधानी दिल्ली में अब पेट्रोल 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. इससे पहले दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 89.67 रुपये प्रति लीटर था.
कई बड़े शहरों में बढ़े ईंधन के दाम
तेल कंपनियों द्वारा जारी नई कीमतों के अनुसार, मुंबई में पेट्रोल अब 106.68 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है. वहीं चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 103.67 रुपये प्रति लीटर हो गई है.
कोलकाता में भी पेट्रोल की कीमत में 3 रुपये से ज्यादा का इजाफा हुआ है और अब यहां एक लीटर पेट्रोल के लिए लोगों को 108.74 रुपये चुकाने होंगे. बिहार में भी पेट्रोल 108.55 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है.
सरकार ने अंतरराष्ट्रीय हालात को बताया वजह
सूत्रों के मुताबिक, सरकार का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और वैश्विक हालात के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. इसका असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ा है.
सरकारी सूत्रों का दावा है कि तेल कंपनियां लंबे समय से भारी घाटा सहन कर रही थीं. बताया गया है कि कंपनियां पेट्रोल पर करीब 26 रुपये और डीजल पर 82 रुपये प्रति लीटर तक का बोझ खुद उठा रही थीं ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके.
टैक्स में कटौती का भी दिया हवाला
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि पहले ही पेट्रोल पर 8 रुपये और डीजल पर 6 रुपये तक टैक्स कम किया जा चुका है. अधिकारियों का कहना है कि यदि यह राहत नहीं दी जाती तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें मौजूदा दरों से कहीं ज्यादा हो सकती थीं.
सरकार के मुताबिक, इस समय दुनिया के कई देशों में ईंधन संकट गहराता जा रहा है. कई जगहों पर पेट्रोल-डीजल की राशनिंग तक शुरू हो चुकी है. दक्षिण-पूर्व एशिया और यूरोप के कई देशों में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है.
ट्रांसपोर्ट और खेती पर बढ़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने से आने वाले दिनों में परिवहन और खेती की लागत भी बढ़ सकती है. इसका असर सब्जियों, राशन और रोजमर्रा की दूसरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ने की संभावना है.
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हालांकि सरकार का कहना है कि यह संकट अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की वजह से पैदा हुआ है और देश में स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं.









