पीएम नरेंद्र मोदी ने संसद में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर गहरी चिंता जताई और कहा कि इस स्थिति ने भारत के सामने नई और अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर देश की संसद से दुनिया को शांति का स्पष्ट संदेश जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और सरकार हर स्तर पर सक्रिय है। उन्होंने कहा कि यह संकट तीन हफ्तों से अधिक समय से जारी है और पूरी दुनिया इसके समाधान की उम्मीद कर रही है।
भारतीयों की सुरक्षित वापसी पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। भारत के मिशन प्रभावित देशों में लगातार काम कर रहे हैं और कई भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार समुद्री मार्गों से आने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी प्रयासरत है।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार सतर्क
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाई है। अब देश अधिक देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जिससे जोखिम कम हुआ है। साथ ही, देश में कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार भी बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों जैसे एथेनॉल ब्लेंडिंग, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से भी देश की ऊर्जा निर्भरता कम हो रही है। सरकार अल्पकालिक और दीर्घकालिक रणनीतियों पर काम कर रही है ताकि इस संकट का असर कम किया जा सके।
अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर नजर
पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा जरूरतों का बड़ा केंद्र है, इसलिए वहां की स्थिति का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत सरकार ने एक इंटर-मिनिस्ट्रियल समूह बनाया है, जो रोजाना स्थिति की समीक्षा कर रहा है और सभी संबंधित पक्षों के साथ समन्वय बनाए हुए है।
किसानों और आम जनता के लिए राहत
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में खाद्यान्न की कोई कमी नहीं है और किसानों को हर संभव सहायता दी जाएगी। उर्वरक की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए भी कदम उठाए गए हैं ताकि वैश्विक महंगाई का असर भारतीय किसानों पर न पड़े।
ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव
प्रधानमंत्री ने बताया कि देश में सौर ऊर्जा क्षमता में तेजी से वृद्धि हुई है और अब यह 100 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। इसके अलावा बायोगैस और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ाया जा रहा है। किसानों को सोलर पंप देने से उनकी डीजल पर निर्भरता कम हुई है।
यह भी पढ़ें: सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों के लिए अहम मौका
कूटनीति ही समाधान
अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने दोहराया कि इस संकट का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही संभव है। भारत ने हमेशा शांति का समर्थन किया है और आगे भी वैश्विक स्तर पर शांति बहाली के प्रयास जारी रखेगा।









