राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए ग्रामीण लोकतंत्र की मजबूती में पंचायतों की अहम भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने इस दिन को जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को सशक्त बनाने और ग्रामीण स्वशासन को सम्मान देने का महत्वपूर्ण अवसर बताया।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि आज देश की पंचायतें केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि वे स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास की दिशा तय करने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, आजीविका, जल संरक्षण और सामाजिक न्याय जैसे क्षेत्रों में पंचायतों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पंचायतों को अधिकार, संसाधन और तकनीक—तीनों स्तरों पर सशक्त किया गया है। सोलहवें वित्त आयोग द्वारा ग्रामीण निकायों के लिए 4.35 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक आवंटन किया गया है, जो पिछले आयोग की तुलना में 84 प्रतिशत अधिक है। इससे पंचायतों की कार्यक्षमता और आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि अब पंचायतों का कामकाज, योजनाएं और वित्तीय प्रबंधन अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बन रहा है। इससे आम नागरिक की भागीदारी भी बढ़ रही है।
नारी शक्ति की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि देशभर में 14 लाख से अधिक महिला जनप्रतिनिधि पंचायतों का नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं न केवल पंचायतों के स्वरूप को बदल रही हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन भी ला रही हैं।

पीएम स्वामित्व योजना का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि इस पहल के तहत ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति का कानूनी अधिकार मिला है। अब तक लगभग 3.3 लाख गांवों में सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और 3 करोड़ से अधिक संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके हैं, जिससे भूमि विवादों में कमी आएगी।
उन्होंने पंचायतों की आर्थिक मजबूती को विकास का आधार बताते हुए कहा कि यदि पंचायतें पारदर्शी और नवाचारपूर्ण तरीके से अपने राजस्व स्रोतों का उपयोग करें, तो वे स्थानीय विकास को नई गति दे सकती हैं। आत्मनिर्भर पंचायतें ही विकसित भारत की नींव रखेंगी।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि स्थानीय संसाधनों का संतुलित और पर्यावरण अनुकूल उपयोग, साथ ही महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी पंचायतों को और प्रभावी बना सकती है। जनभागीदारी से लिए गए निर्णय न केवल तेज विकास सुनिश्चित करते हैं, बल्कि उन्हें टिकाऊ और न्यायसंगत भी बनाते हैं।
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अंत में, उन्होंने राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार से सम्मानित सभी पंचायतों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान अन्य पंचायतों को भी प्रेरित करेगा। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि वे मिलकर सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक पंचायतों के निर्माण का संकल्प लें, जिससे गांवों की समृद्धि के साथ राष्ट्र को नई ऊर्जा और दिशा मिल सके।









