कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को संसद में पहलगाम हमले को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने एक ओर जहां सेना के साहस और बलिदान को नमन किया, वहीं दूसरी ओर सरकार की जिम्मेदारी और एजेंसियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज़ादी देश को अहिंसा के रास्ते से मिली, लेकिन आज़ादी के बाद से अब तक देश की अखंडता को बनाए रखने में भारतीय सेना ने हर मोर्चे पर बहादुरी दिखाई है।
हमले की जिम्मेदारी कौन लेगा?
प्रियंका गांधी ने कहा कि मंत्रियों ने ऐतिहासिक घटनाओं का ज़िक्र कर अपनी बात रखी, लेकिन एक बुनियादी सवाल अब भी बाकी है—पहलगाम में हमला हुआ कैसे और क्यों? उन्होंने कहा कि यह सवाल हर नागरिक के मन में है और इसका जवाब अब तक नहीं मिला है।
उन्होंने दिवंगत शुभम द्विवेदी की पत्नी के हवाले से कहा कि लोग सरकार के भरोसे तीर्थ यात्रा पर गए थे, लेकिन उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया गया। “हमले की जिम्मेदारी किसकी है? क्या नागरिकों की सुरक्षा गृह मंत्री और रक्षा मंत्री की ज़िम्मेदारी नहीं है?” उन्होंने दो टूक पूछा।
एजेंसियों की विफलता या नहीं?
प्रियंका गांधी ने आतंकवादी संगठन टीआरएफ की गतिविधियों का ज़िक्र करते हुए पूछा कि यदि इस संगठन की जानकारी सरकार को थी, तो फिर हमले की योजना की भनक एजेंसियों को क्यों नहीं लगी? उन्होंने इसे “एजेंसियों की बड़ी विफलता” करार दिया और कहा कि इस पर कोई जवाबदेही तय नहीं की गई।

न इस्तीफा, न जवाबदेही
उन्होंने कहा कि जब देश में इतनी बड़ी घटना होती है, तो क्या कोई मंत्री या एजेंसी प्रमुख जिम्मेदारी लेता है? “न कोई इस्तीफा देता है, न कोई जवाबदेही लेता है।” उन्होंने कहा कि जब गौरव गोगोई ने हमले की ज़िम्मेदारी की बात की, तो राजनाथ सिंह सिर हिला रहे थे लेकिन गृह मंत्री अमित शाह हँसते नज़र आए।
इतिहास नहीं, वर्तमान की बात करिए
प्रियंका गांधी ने कहा, “आप इतिहास की बात करिए, मैं वर्तमान की बात करूँगी।” उन्होंने सरकार को याद दिलाया कि कांग्रेस शासन के दौरान मुंबई हमले के बाद तत्कालीन गृह मंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया था। “आज जब देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंसा हो रही है—मणिपुर जल रहा है, दिल्ली दंगे हुए, पहलगाम हमला हुआ—गृह मंत्री आज भी अपने पद पर बने हुए हैं।”
सेना को सलाम, लेकिन श्रेय कौन चाहता है?
प्रियंका गांधी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में सेना ने अद्भुत शौर्य का प्रदर्शन किया, लेकिन इसका श्रेय प्रधानमंत्री को दिया जा रहा है। “देश पर हमला होगा तो हम सब एकजुट होकर सरकार के साथ खड़े होंगे, लेकिन सवाल पूछना भी हमारा हक है,” उन्होंने कहा।
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प्रियंका गांधी के इस भावनात्मक और तीखे संबोधन से संसद में हलचल मच गई और उनके सवालों ने सुरक्षा व्यवस्था, एजेंसियों की सतर्कता और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।









