मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच पीएम मोदी ने देशवासियों से संसाधनों के सीमित इस्तेमाल और बचत को लेकर अपील की है। हालांकि प्रधानमंत्री की इस अपील पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे सरकार की विफलता बताया है।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से अपील की कि वे फिलहाल सोने की खरीदारी सीमित करें, गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचें और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करें। उन्होंने कंपनियों को भी जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था बढ़ाने की सलाह दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ा है। ऐसे समय में ईंधन की बचत और संसाधनों का समझदारी से इस्तेमाल बेहद जरूरी है।
उन्होंने कोरोना काल का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने पहले भी ऑनलाइन मीटिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और घर से काम जैसी व्यवस्थाओं को अपनाया था और जरूरत पड़ने पर इन्हें फिर प्राथमिकता दी जा सकती है।
राहुल गांधी का पलटवार
प्रधानमंत्री के बयान के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार को घेरते हुए कहा कि जनता को लगातार त्याग की सलाह देना सरकार की नाकामी को दर्शाता है।
उन्होंने लिखा कि देश की स्थिति ऐसी हो गई है जहां लोगों को यह बताया जा रहा है कि क्या खरीदना चाहिए, क्या नहीं खरीदना चाहिए और कहां जाना चाहिए या नहीं जाना चाहिए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार हर बार जिम्मेदारी जनता पर डालकर खुद जवाबदेही से बचने की कोशिश करती है।
महंगाई और वैश्विक संकट का असर
सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते पेट्रोल-डीजल, खाद और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। प्रधानमंत्री ने किसानों को मिलने वाली खाद सब्सिडी का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया के कई देशों में उर्वरक महंगे हो चुके हैं, लेकिन भारत सरकार किसानों को राहत देने के लिए भारी सब्सिडी दे रही है।
राजनीतिक बहस तेज
प्रधानमंत्री की अपील और राहुल गांधी के जवाब के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। बीजेपी इसे वैश्विक संकट के दौर में जिम्मेदार नागरिकता का संदेश बता रही है, जबकि विपक्ष सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठा रहा है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर भारत समेत दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।









