RBI Repo Rate Hike: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अक्टूबर 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में बड़ा फैसला लिया है। RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की है। 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर 2026 तक चली MPC बैठक में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, खाद्य महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से जुड़े जोखिमों पर चर्चा की गई।
रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर बैंकिंग सिस्टम पर पड़ता है। खासकर फ्लोटिंग ब्याज दर वाले होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज लेने वाले ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है। दूसरी तरफ, बैंक FD पर ब्याज दरें बढ़ाकर जमाकर्ताओं को इसका फायदा दे सकते हैं।
RBI ने कितनी बढ़ाई Repo Rate?
RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। यानी दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे बैंकों के लिए RBI से अल्पकालिक कर्ज लेना पहले की तुलना में महंगा हो जाएगा।
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को पैसा उधार देता है। इसलिए इसमें बदलाव होने पर बैंकिंग सिस्टम की फंडिंग लागत प्रभावित होती है और उसका असर आगे चलकर लोन तथा जमा दरों पर देखने को मिल सकता है।
Post Monetary Policy Press Conference by Shri Sanjay Malhotra, Governor, RBI – October 7, 2026 https://t.co/fhYuQM4Hp7
— ReserveBankOfIndia (@RBI) October 7, 2026
इससे पहले कब बढ़ा था Repo Rate?
RBI ने इससे पहले फरवरी 2023 में रेपो रेट बढ़ाया था। उस समय केंद्रीय बैंक ने इसमें 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करके इसे 6.50 फीसदी कर दिया था। इसके बाद लंबे समय तक रेपो रेट इसी स्तर पर बना रहा।
फिर 2025 में महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव को देखते हुए RBI ने ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू किया।
2025 में चार बार घटा था रेपो रेट
- फरवरी 2025: रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती, दर 6.25% हुई।
- अप्रैल 2025: फिर 25 बेसिस पॉइंट की कमी, रेपो रेट 6.00% पर आया।
- जून 2025: RBI ने बड़ी 50 बेसिस पॉइंट की कटौती की और दर 5.50% हो गई।
- दिसंबर 2025: 25 बेसिस पॉइंट की एक और कटौती के बाद रेपो रेट 5.25% पर आ गया।
इसके बाद लगभग 10 महीने तक रेपो रेट 5.25 फीसदी पर स्थिर रहा। अब अक्टूबर 2026 की MPC बैठक में केंद्रीय बैंक ने इसमें फिर 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है।
Repo Rate बढ़ने से Loan EMI पर क्या असर पड़ेगा?
रेपो रेट बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जिन्होंने फ्लोटिंग ब्याज दर पर लोन लिया है। यदि बैंक अपनी लेंडिंग रेट में बढ़ोतरी करते हैं, तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं।
ऐसे में बैंक दो तरह से असर डाल सकते हैं। पहला, ग्राहक की EMI बढ़ाई जा सकती है और दूसरा, EMI को लगभग समान रखते हुए लोन की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
वहीं, फिक्स्ड रेट वाले लोन पर RBI के रेपो रेट बढ़ाने का तत्काल सीधा प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि उनकी ब्याज दर पहले से तय होती है।
₹50 लाख के Home Loan पर कितनी बढ़ सकती है EMI?
रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद यदि बैंक भी ब्याज दर में समान वृद्धि करते हैं, तो ग्राहकों की EMI पर असर पड़ सकता है।
उदाहरण के तौर पर, ₹50 लाख के होम लोन पर यदि ब्याज दर 7.50 फीसदी से बढ़कर 7.75 फीसदी हो जाती है और लोन की अवधि 20 साल है, तो मासिक EMI में करीब ₹777 का इजाफा हो सकता है।
यानी:
| विवरण | 7.50% ब्याज | 7.75% ब्याज |
|---|---|---|
| लोन राशि | ₹50 लाख | ₹50 लाख |
| अवधि | 20 साल | 20 साल |
| अनुमानित EMI | ₹40,280 | ₹41,057 |
| EMI में अंतर | — | करीब ₹777 |
इसी तरह यदि ₹50 लाख का होम लोन 25 साल के लिए लिया गया है, तो ब्याज दर में 0.25 फीसदी की वृद्धि से EMI में भी बढ़ोतरी होगी। हालांकि, वास्तविक EMI बैंक की ब्याज दर, रीसेट नियम और लोन की शर्तों पर निर्भर करेगी।
क्या FD कराने वालों को होगा फायदा?
रेपो रेट बढ़ने का असर केवल कर्ज लेने वालों तक सीमित नहीं रहता। यदि बैंक अपनी जमा दरों में भी वृद्धि करते हैं, तो Fixed Deposit (FD) कराने वाले ग्राहकों को अधिक ब्याज मिल सकता है।
इसलिए ब्याज दर बढ़ने के माहौल में जहां फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज महंगे हो सकते हैं, वहीं बचत और FD पर बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।
क्यों बढ़ाया गया Repo Rate?
अक्टूबर की MPC बैठक में महंगाई से जुड़े कई जोखिमों पर ध्यान दिया गया। पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में संभावित तेजी, खाद्य वस्तुओं की कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ऐसे प्रमुख कारक हैं, जो भारत में महंगाई के दबाव को प्रभावित कर सकते हैं।
RBI ब्याज दरों के जरिए महंगाई और आर्थिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है। रेपो रेट में बढ़ोतरी का उद्देश्य जरूरत पड़ने पर महंगाई के दबाव को नियंत्रित करना भी होता है।
आम लोगों की जेब पर क्या पड़ेगा असर?
रेपो रेट बढ़ने का असर अलग-अलग लोगों पर अलग हो सकता है। फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन ग्राहक ज्यादा EMI या लंबी लोन अवधि के रूप में इसका असर महसूस कर सकते हैं। वहीं, जिन लोगों की बचत FD में है, उन्हें बैंक की जमा दरें बढ़ने पर अतिरिक्त ब्याज का लाभ मिल सकता है।
हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि हर बैंक तुरंत अपनी ब्याज दरों में ठीक 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी करे। वास्तविक असर बैंक की बाहरी बेंचमार्क दर, लोन के प्रकार और ब्याज रीसेट की शर्तों पर निर्भर करेगा।
यह भी पढ़ें: त्योहारों से पहले लाखों कर्मचारियों को केंद्र सरकार का तोहफा, VDA में बढ़ोतरी
RBI के अक्टूबर 2026 के फैसले के बाद ब्याज दरों को लेकर बाजार में बदलाव देखने को मिल सकता है। रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी से फ्लोटिंग रेट वाले लोन महंगे होने की संभावना है, जबकि बैंक FD और अन्य जमा योजनाओं पर ब्याज दरें बढ़ाकर बचत करने वालों को फायदा दे सकते हैं। होम लोन लेने वालों के लिए अब बैंक की नई ब्याज दर और EMI रीसेट नियमों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।







