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Saudi Arabia: सौ से अधिक विदेशियों को मृत्यु दंड, मरने वालों में सर्वाधिक पाकिस्तानी,कितने भारतीय?

ये लोग फांसी के पहले फंदे को चूमते नहीं हैं,रोते हैं,दया की भीख मांगते हैं पर सुनने वाला कौन होता है

Parijat Tripathi by Parijat Tripathi
19 November 2024
in जुर्म, दुनिया
0
यहां मौत से किसकी यारी है..आज मेरी तो कल तेरी बारी है !

यहां मौत से किसकी यारी है..आज मेरी तो कल तेरी बारी है !

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Saudi Arabia: फिर मौत की सजा देने के मामले में चर्चा में है सऊदी अरब, इसके पहले भी आठ भारतीयों को मोदी सरकार ने बचाया था.
मौत की सजा कितनी जरूरी है और कितनी नहीं -ये एक अलग विषय है. अलग-अलग देशों के इस पर अपने अलग-अलग विचार हैं. इसी कारण हर देश में मौत की सजा का विधान नहीं है, किन्तु मुस्लिम देशों में ऐसा नहीं है. मुस्लिम देशों का क़ानून शरीयत से चलता है. आँख के बदले आँख और खून के बदले खून का फैसला सुनाने वाले शरिया के अनुसार मौत की सजा गलत नहीं है.
सऊदी अरब में मौत की सजा दी जाती है. हाल ही में इस देश में जो मौत की सजा दी गई उसमें पुराने सभी रिकॉर्ड टूट गए . इस देश में इस साल याने केवल 2024 के ग्यारह महीनो में अब तक सौ से ज्यादा विदेशी नागरिकों को मृत्युदंड दिया जा चुका है. मज़े की बात, सजा पाने वालों में सबसे ज्यादा पाकिस्तानी नागरिक हैं. इसके अतिरिक्त कई और देशों के नागरिकों को भी मृत्युदंड दिया गया है.

मौत की सजा का पुराना रिकॉर्ड टूटा

सऊदी अरब ने इस साल सौ से ज्यादा उन अपराधियों को मौत की सजा दी है जो बाहर के हैं. विदेशी नागरिको को लेकर सऊदी अरब में दी जाने वाली मौत की सजा के आंकड़ों में इतनी अधिक बढ़ोत्तरी पहले कभी नहीं देखी गई है.
सऊदी प्रेस एजेंसी का इस पर कहना है कि ये जरूरी है. दो दिन पहले 17 नवम्बर को शनिवार के दिन दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र नज़रान में एक अपराधी को मौत की सजा सुनाई गई थी. ये अपराधी यमन देश का नागरिक था. ये यमनी नागरिक सऊदी अरब में नशीली दवाओं की तस्करी करने का दोषी था.
सरकार की मीडिया रिपोर्ट इस विषय पर जो आंकड़े प्रस्तुत करती है उसके अनुसार साल 2024 में अब तक याने ग्यारह महीनो में मौत की सजा से मारे गए विदेशियों की संख्या 101 हो गई है. एएफपी की रिपोर्ट बताती है कि यह 101 की संख्या साल 2023 और 2022 के आंकड़ों से करीब तीन गुना ज्यादा है. दूसरे शब्दों में कहें तो पिछले दो सालों से हर साल करीब चौंतीस विदेशियों को यहां मौत की सजा दी जा चुकी है.

पुराना तोड़ा और नया बनाया कीर्तिमान

ईएसओएचआर नाम का एक मानवाधिकार संगठन है जो कि बर्लिन में स्थित है और यूरोपीय-सऊदी मानवाधिकार संगठन के नाम से जाना जाता है. इस संगठन का कहना है कि इस साल की सजाओं ने पहले ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है. अभी एक माह और दस दिन पूरे बचे हैं. देखते हैं इन चालीस दिनों में कितने मरेंगे और कितने बचेंगे इस देश में.
ताहा अल-हज्जी नाम के सज्जन इस संगठन के कानूनी डायरेक्टर हैं. हज्जि कहते हैं , “यह एक साल में विदेशियों को दी गई मौत की सजा की सबसे बड़ी संख्या है. इस देश में पहले कभी एक साल में 100 विदेशियों को फांसी नहीं दी गई है.”
सऊदी अरब को मृत्युदंड के अपने कानूनी उपयोग के लिए बहुत सुनना पड़ता है. दुनिया भर में उसकी आलोचना होती है. पर उसको कोई फर्क नहीं पड़ता है. इस बात पर भी मानवाधिकार समूह निंदा करते हैं और कहते हैं कि इस देश को अपनी छवि सही रखने की कोई चिंता नहीं है. न ही इसको अपने देश में आने वाले पर्यटकों की कोई फ़िक्र है न ही ये अपने विदेशी निवेशकों का स्वागत करने के लिए इस काम में किसी तरह की कोई ढील करता है.

सर्वाधिक मृत्युदंड वाले 3 देशों में एक

तेल की कमाई पर मजे करने वाला देश सऊदी अरब के मौत की सजा वाले इस क़ानून पर एमनेस्टी इंटरनेशनल कहना है कि पिछले साल 2023 में चीन और ईरान के बाद दुनिया में तीसरा ऐसा देश था जिसने सबसे अधिक संख्या में कैदियों को फांसी देने का कीर्तिमान बनाया है.
इस बार साल के खत्म होने के तीन महीने पहले ही सितंबर में, एएफपी के अनुसार, सऊदी अरब ने तीन दशकों से अधिक समय में सबसे अधिक संख्या में कैदियों को फांसी देने का नया रिकॉर्ड बनाया है. यह आंकड़ा 2022 में 196 और 1995 में 192 के अपने पिछले उच्चतम स्तर से भी आगे बढ़ गया है. रिपोर्ट बताती है कि एक दिन पहले तक इस साल याने रविवार 17 नवम्बर तक सऊदी अरब कुल 274 लोगों को फांसी के घाट चढ़ा चुका है.

किन देशों के कितने नागरिकों को दी गई फांसी

इस साल जिन विदेशियों फंदे पर लटकाया गया उनमें पाकिस्तान से 21, यमन से 20, सीरिया से 14, नाइजीरिया के 10 नागरिक शामिल थे. इसके अलावा मिस्र से नौ, जॉर्डन से आठ और इथियोपिया से सात कैदी इस सूची में शामिल हैं. वहीं सूडान, भारत और अफगानिस्तान से तीन-तीन अपराधी और और श्रीलंका, इरिट्रिया और फिलीपींस से एक-एक दोषी फांसी की सजा पर अपना नाम लिखा चुके हैं.
दो साल पहले साल 2022 में सऊदी अरब ने ड्रग अपराधियों की फांसी पर लगी तीन साल की रोक को समाप्त कर दिया था और फिर उसके बाद से ही नशीली दवाओं से जुड़े अपराधियों के लिए फांसी की संख्या में इस साल खासी बढ़ोत्तरी दिखाई दी है.
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