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Good News! वैज्ञानिकों ने अमेजन की जंगलों में खोजा प्लास्टिक खाने वाला फंगस, प्लास्टिक प्रदूषण में मिलेगी राहत

Plastic Eating fungi: वैज्ञानिकों ने ऐसे फंगस (कवक) की खोज की है जो सिंथेटिक पॉलिमर पर ही विकसित होता है और प्लास्टिक को खाकर बायोमास बना सकता है।

Kiran rautela by Kiran rautela
9 July 2025
in दुनिया, नई तकनीकी, भारत
0
PLASTIC EATING FUNGI

#PLASTIC EATING FUNGI

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PLASTIC EATING FUNGI: प्रदूषण देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए भी एक चुनौती बनता जा रहा है। इसी क्रम में एक नाम आता है, प्लास्टिक प्रदूषण- जो मानव स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी तंत्र और जानवरों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। यह एक गंभीर वैश्विक समस्या है, क्योंकि प्लास्टिक बायोडिग्रेडेबल नहीं होता और सैकड़ों वर्षों तक वातावरण में बना रहता है।

प्लास्टिक प्रदूषण आज के सबसे गंभीर पर्यावरणीय संकटों में से एक है। हर साल लगभग 8 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा समुद्रों में पहुंचता है, जिससे समुद्री जीवन, पारिस्थितिकी और भूमि प्रदूषण पर गंभीर असर पड़ता है। खासतौर पर पॉलीथीन (PE) और पॉलीयूरीथेन (PU) जैसे गैर-बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का निपटान बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।

यह भी पढ़ें- सलमान खान ने अपनी शादी को लेकर दिया बड़ा इशारा, फैंस ने पूछे तरह-तरह के सवाल

हालांकि प्लास्टिक की खपत को घटाने और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के प्रयास लगातार हो रहे हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक कचरा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।

PLASTIC EATING FUNGI
PLASTIC EATING FUNGI

जर्मनी की झील में हुई चौंकाने वाली खोज

जर्मनी की लेक स्टेचलिन में वैज्ञानिकों द्वारा की गई हालिया खोज ने दुनिया को एक नई उम्मीद दी है। वैज्ञानिकों ने ऐसे फंगस (कवक) की खोज की है जो सिंथेटिक पॉलिमर पर ही विकसित होता है और प्लास्टिक को खाकर बायोमास बना सकता है।

ये फंगस विशेष परिस्थितियों जैसे तापमान, सूक्ष्म पोषक तत्व आदि पर निर्भर करता है और प्लास्टिक को ऊर्जा स्रोत के रूप में उपयोग करने में सक्षम है। यह खोज तेजी से बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए एक क्रांतिकारी समाधान हो सकती है।

PLASTIC EATING FUNGI
PLASTIC EATING FUNGI

येल यूनिवर्सिटी की 2011 की खोज बनी आधार

2011 में येल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने अमेजन वर्षावन में Pestalotiopsis microspora नामक फंगस की खोज की थी, जो ऑक्सीजन रहित (anaerobic) परिस्थितियों में पॉलीयूरीथेन प्लास्टिक को पचा सकता है। इस खोज ने आगे चलकर विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक को नष्ट करने में सक्षम फंगस प्रजातियों पर रिसर्च का रास्ता खोला।

कैसे काम करता है यह फंगस?

ये फंगस विशेष एंजाइम के ज़रिए प्लास्टिक को छोटे-छोटे रासायनिक घटकों में तोड़ता है। ये एंजाइम लंबे पॉलिमर चेन को सरल यौगिकों में तोड़ते हैं, जिन्हें फंगस ऊर्जा के रूप में उपयोग करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये एंजाइम औद्योगिक स्तर पर तैयार किए जा सकते हैं, जिससे प्लास्टिक कचरे का कुशलता से निपटान संभव हो सकेगा।

PLASTIC EATING FUNGI
#PLASTIC EATING FUNGI

बैक्टीरिया भी दे रहे हैं उम्मीद

फंगस के अलावा, वैज्ञानिकों ने 2016 में जापान में खोजे गए बैक्टीरिया Ideonella sakaiensis की भी पहचान की है, जो PET प्लास्टिक को नष्ट कर सकता है। हालांकि, फंगस की खास बात यह है कि यह अधिक विविध पर्यावरणों में जीवित रह सकता है और कई प्रकार के प्लास्टिक को तोड़ सकता है।

चुनौतियां और संभावनाएं

हालांकि ये खोजें उत्साहजनक हैं, लेकिन इन्हें वैश्विक स्तर पर लागू करने से पहले कई बाधाओं को पार करना होगा। इन फंगस और बैक्टीरिया का प्रभावी उपयोग करने के लिए अधिक शोध, प्रभावशीलता में सुधार, और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़े नैतिक सवालों के उत्तर खोजने जरूरी हैं।

प्लास्टिक खाने वाले फंगस की खोज इस गंभीर संकट में एक ‘सिल्वर लाइनिंग’ की तरह है। यदि इनका सफलतापूर्वक उपयोग किया गया, तो यह दुनिया के कचरा प्रबंधन को पूरी तरह से बदलकर एक स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य की ओर ले जा सकता है।

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