PLASTIC EATING FUNGI: प्रदूषण देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए भी एक चुनौती बनता जा रहा है। इसी क्रम में एक नाम आता है, प्लास्टिक प्रदूषण- जो मानव स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी तंत्र और जानवरों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। यह एक गंभीर वैश्विक समस्या है, क्योंकि प्लास्टिक बायोडिग्रेडेबल नहीं होता और सैकड़ों वर्षों तक वातावरण में बना रहता है।
प्लास्टिक प्रदूषण आज के सबसे गंभीर पर्यावरणीय संकटों में से एक है। हर साल लगभग 8 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा समुद्रों में पहुंचता है, जिससे समुद्री जीवन, पारिस्थितिकी और भूमि प्रदूषण पर गंभीर असर पड़ता है। खासतौर पर पॉलीथीन (PE) और पॉलीयूरीथेन (PU) जैसे गैर-बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का निपटान बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।
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हालांकि प्लास्टिक की खपत को घटाने और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के प्रयास लगातार हो रहे हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक कचरा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।

जर्मनी की झील में हुई चौंकाने वाली खोज
जर्मनी की लेक स्टेचलिन में वैज्ञानिकों द्वारा की गई हालिया खोज ने दुनिया को एक नई उम्मीद दी है। वैज्ञानिकों ने ऐसे फंगस (कवक) की खोज की है जो सिंथेटिक पॉलिमर पर ही विकसित होता है और प्लास्टिक को खाकर बायोमास बना सकता है।
ये फंगस विशेष परिस्थितियों जैसे तापमान, सूक्ष्म पोषक तत्व आदि पर निर्भर करता है और प्लास्टिक को ऊर्जा स्रोत के रूप में उपयोग करने में सक्षम है। यह खोज तेजी से बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए एक क्रांतिकारी समाधान हो सकती है।
येल यूनिवर्सिटी की 2011 की खोज बनी आधार
2011 में येल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने अमेजन वर्षावन में Pestalotiopsis microspora नामक फंगस की खोज की थी, जो ऑक्सीजन रहित (anaerobic) परिस्थितियों में पॉलीयूरीथेन प्लास्टिक को पचा सकता है। इस खोज ने आगे चलकर विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक को नष्ट करने में सक्षम फंगस प्रजातियों पर रिसर्च का रास्ता खोला।
कैसे काम करता है यह फंगस?
ये फंगस विशेष एंजाइम के ज़रिए प्लास्टिक को छोटे-छोटे रासायनिक घटकों में तोड़ता है। ये एंजाइम लंबे पॉलिमर चेन को सरल यौगिकों में तोड़ते हैं, जिन्हें फंगस ऊर्जा के रूप में उपयोग करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये एंजाइम औद्योगिक स्तर पर तैयार किए जा सकते हैं, जिससे प्लास्टिक कचरे का कुशलता से निपटान संभव हो सकेगा।
बैक्टीरिया भी दे रहे हैं उम्मीद
फंगस के अलावा, वैज्ञानिकों ने 2016 में जापान में खोजे गए बैक्टीरिया Ideonella sakaiensis की भी पहचान की है, जो PET प्लास्टिक को नष्ट कर सकता है। हालांकि, फंगस की खास बात यह है कि यह अधिक विविध पर्यावरणों में जीवित रह सकता है और कई प्रकार के प्लास्टिक को तोड़ सकता है।
चुनौतियां और संभावनाएं
हालांकि ये खोजें उत्साहजनक हैं, लेकिन इन्हें वैश्विक स्तर पर लागू करने से पहले कई बाधाओं को पार करना होगा। इन फंगस और बैक्टीरिया का प्रभावी उपयोग करने के लिए अधिक शोध, प्रभावशीलता में सुधार, और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़े नैतिक सवालों के उत्तर खोजने जरूरी हैं।
प्लास्टिक खाने वाले फंगस की खोज इस गंभीर संकट में एक ‘सिल्वर लाइनिंग’ की तरह है। यदि इनका सफलतापूर्वक उपयोग किया गया, तो यह दुनिया के कचरा प्रबंधन को पूरी तरह से बदलकर एक स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य की ओर ले जा सकता है।








