रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आगमन से ठीक पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार विदेशी प्रतिनिधियों की विपक्ष से मुलाकात नहीं होने देना चाहती। उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
सरकार का जवाब: ‘किससे मिलना है, यह विदेशी प्रतिनिधिमंडल तय करता है’
राहुल गांधी के आरोपों के तुरंत बाद सरकारी सूत्रों ने सफाई देते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय केवल उन्हीं बैठकों की व्यवस्था करता है, जिनका अनुरोध आने वाले विदेशी प्रतिनिधिमंडल की तरफ से किया जाता है।
सूत्रों ने स्पष्ट किया, “किसी भी आधिकारिक दौरे के दौरान विदेश मंत्रालय सरकारी अधिकारियों और संस्थानों के साथ मुलाकात की तैयारी करता है। सरकार के बाहर किससे मिलना है, यह पूरी तरह विजिटिंग डेलीगेशन का फैसला होता है।”
राहुल गांधी के आरोप: ‘परंपरा तोड़ी जा रही है’
राहुल गांधी ने कहा कि भारत आने वाले उच्च-स्तरीय विदेशी मेहमानों की नेता प्रतिपक्ष से मुलाकात पहले से परंपरा रही है। उनका दावा है कि अब सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती है कि उनसे कोई विदेशी डेलीगेशन न मिले।
उन्होंने कहा, “अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के समय में भी यह परंपरा निभाई जाती थी। लेकिन अब सरकार सुझाव देती है कि विदेश से आने वाले अतिथि नेता प्रतिपक्ष से मुलाकात न करें। यह विदेश मंत्रालय की ओर से नियमों का पालन न करने का मामला है।”
राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि विपक्ष भी भारत का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन सरकार उसे विदेश नीति से जुड़े संवाद से दूर रखना चाहती है।
किन विदेशी नेताओं से मिल चुके हैं राहुल गांधी?
नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद राहुल गांधी कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। इनमें शामिल हैं—
- 10 जून 2024 — बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना
- 1 अगस्त 2024 — वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिंग
- 21 अगस्त 2024 — मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम
- 8 मार्च 2025 — न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन
- 16 सितंबर 2025 — मॉरिशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम
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पुतिन के दौरे से पहले राजनीति गरमाई
रूसी राष्ट्रपति के महत्वपूर्ण भारत दौरे के ठीक पहले विपक्ष और सरकार के बीच यह बयानबाज़ी एक नई राजनीतिक खींचतान का संकेत देती है। जहां सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह विदेशी प्रतिनिधिमंडलों पर निर्भर करती है, वहीं राहुल गांधी इसे लोकतांत्रिक परंपराओं को तोड़ने की कोशिश बता रहे हैं।









