देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में है। संसद का शीतकालीन सत्र शुक्रवार (19 दिसंबर) को जानलेवा प्रदूषण पर बिना चर्चा के ही समाप्त हो गया। सर्दियों के मौसम में प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच गया है, जिससे आम जनजीवन और लोगों की सेहत पर गहरा असर पड़ रहा है लेकिन सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ रहा। हवा में घुले जहरीले कण सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और कई गंभीर बीमारियों का कारण बन रहे हैं।
खतरनाक स्तर पर एयर क्वालिटी
दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार खराब से बेहद खराब श्रेणी में बना हुआ है। कई इलाकों में यह स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी को भी पार कर चुका है। धुंध और स्मॉग के कारण दृश्यता कम हो गई है, जिससे सड़क और हवाई यातायात भी प्रभावित हो रहा है।
सेहत पर पड़ रहा सीधा असर
डॉक्टरों के अनुसार, प्रदूषित हवा का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर पड़ रहा है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी, आंखों में जलन, सिरदर्द और गले में खराश जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से फेफड़ों और दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या
दिल्ली के कई सरकारी और निजी अस्पतालों में सांस से जुड़ी शिकायतों के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। खासकर सुबह और देर शाम के समय बाहर निकलने वालों में खांसी, सांस फूलना और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
प्रदूषण के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के पीछे वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना प्रमुख कारण हैं। सर्दियों में हवा की रफ्तार कम होने से प्रदूषक तत्व वातावरण में ही जमा हो जाते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण के इस दौर में विशेष सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
- बाहर निकलते समय एन-95 या अच्छे क्वालिटी का मास्क पहनें।
- सुबह और देर शाम खुले में टहलने या व्यायाम से बचें।
- घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और खिड़कियां बंद रखें।
- बच्चों और बुजुर्गों को अनावश्यक रूप से बाहर न जाने दें।
- धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनाएं और अधिक से अधिक पानी पिएं।
- हरी सब्जियां, फल और एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार का सेवन करें।
सरकार और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी
प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार द्वारा कई कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन इसके साथ-साथ नागरिकों की जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है। निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, कारपूलिंग और निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन जैसे उपायों से प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
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दिल्ली की बिगड़ती हवा अब केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का गंभीर मुद्दा बन चुकी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ सकता है।









