बांग्लादेश इस समय गहरे राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। जुलाई में हुए जनविद्रोह के प्रमुख चेहरों में शामिल शरीफ उस्मान हादी के सिंगापुर में निधन की खबर ने हालात को और ज्यादा विस्फोटक बना दिया है। जैसे ही उसकी मौत की पुष्टि हुई, ढाका समेत देश के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शनों की लहर दौड़ गई। सड़कों पर उतर आए प्रदर्शनकारी, आगजनी और झड़पों की घटनाओं ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
हादी इंकलाब मंच का संयोजक था और छात्र आंदोलन से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में तेजी से अपनी पहचान बना रहा था। उसके समर्थकों में गहरा आक्रोश और शोक देखने को मिल रहा है, जो लगातार उग्र प्रदर्शनों का रूप ले रहा है।
सरकार को दी थी कड़ी चेतावनी
हादी के निधन से पहले ही इंकलाब मंच ने सरकार को चेतावनी दी थी कि जब तक उस पर हमला करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक शाहबाग चौराहे पर अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। संगठन ने साफ कहा था कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को पूरे देश में फैलाया जाएगा। मंच का दावा है कि यह संघर्ष सिर्फ एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि न्याय और राष्ट्रीय सम्मान के लिए है।
भारत भागने का आरोप, कूटनीतिक दबाव
इंकलाब मंच ने यह भी कहा कि यदि हमले के आरोपी भारत भाग गए हैं, तो बांग्लादेश सरकार को भारतीय अधिकारियों से बातचीत कर उनकी वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए। इस बयान के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। संगठन का कहना है कि यह मामला कानून व्यवस्था के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
मौत की खबर के बाद हिंसा भड़की
सिंगापुर से हादी की मौत की पुष्टि होते ही ढाका में हालात तेजी से बिगड़े। कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव देखने को मिला। दो समाचार पत्रों के दफ्तरों में आगजनी की घटनाएं सामने आईं। स्थिति को संभालने के लिए राजधानी में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और प्रशासन हाई अलर्ट पर है।
दिनदहाड़े हुआ था हमला
12 दिसंबर को ढाका के पलटन क्षेत्र में जुमे की नमाज के बाद लौटते समय हादी पर हमला किया गया था। बाइक सवार हमलावरों ने उसके सिर में गोली मार दी थी। गंभीर हालत में उसे पहले ढाका के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, फिर बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर भेजा गया। छह दिन तक संघर्ष करने के बाद 18 दिसंबर की रात उसकी मौत हो गई।
‘शहीद’ घोषित किया इंकलाब मंच ने
हादी की मौत की पुष्टि करते हुए इंकलाब मंच ने उसे शहीद बताया है। समर्थकों के अनुसार, वह जुलाई विद्रोह का प्रतीक था और युवाओं के लिए एक प्रेरणा माना जाता था।
सरकार की प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय शोक
अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने हादी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सरकार ने एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है। यूनुस ने दोषियों को सख्त सजा देने का आश्वासन देते हुए जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है।
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कौन था शरीफ उस्मान हादी
शरीफ उस्मान हादी जुलाई 2024 के छात्र-आंदोलन से उभरा नेता था, जिसके बाद शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हुई। वह आगामी संसदीय चुनाव में ढाका-8 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर तैयारी कर रहा था। अपने तीखे भारत-विरोधी और शेख हसीना-विरोधी बयानों के कारण वह खासा चर्चित था।









