21 जून को पूरे भारत समेत दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस वर्ष की थीम रही – “योग के साथ सशक्त जीवन”, और इसी संदेश को लेकर देश के हर कोने में हजारों योग प्रेमियों ने हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत वादियों में स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर (SKICC), श्रीनगर में योगाभ्यास किया। इस दौरान उन्होंने कश्मीर की महिलाओं के साथ फोटो खिंचवाकर सौहार्द और संस्कृति का संदेश भी दिया, जिसकी सोशल मीडिया पर खूब सराहना हो रही है।
राजधानी दिल्ली में गांधी मंडेला फाउंडेशन का विशेष आयोजन
दिल्ली में भी योग दिवस का उत्सव पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया गया। गांधी मंडेला फाउंडेशन ने सफदरजंग एन्क्लेव के निकट स्थित डियर पार्क में एक भव्य योग शिविर का आयोजन किया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। योग के विभिन्न आसनों के साथ जीवन में इसके महत्व पर चर्चा की गई।
इस कार्यक्रम में भारत में सेनेगल की राजदूत फातिमा भी मौजूद रहीं। उन्होंने आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल सेहत के लिए उपयोगी हैं, बल्कि समाज को जोड़ने और प्रेरित करने का कार्य भी करते हैं।

श्याम जाजू और अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं गांधी मंडेला फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम जाजू भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा, “आज दिल्ली का शायद ही कोई पार्क खाली हो। यह दृश्य प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों का परिणाम है कि योग अब सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व का आंदोलन बन गया है।”

गांधी स्मृति और दर्शन समिति के निदेशक संजीत कुमार ने भी योग की सांस्कृतिक और मानवीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग भारत की उस विरासत का हिस्सा है जो विश्व कल्याण की बात करती है। उन्होंने महात्मा गांधी और भगवान बुद्ध के विचारों की प्रासंगिकता को दोहराया और कहा कि आज भी सत्य और अहिंसा की राह ही स्थायी समाधान है।
फाउंडेशन के चेयरमैन नंदन कुमार झा ने बढ़ाया उत्साह
गांधी मंडेला फाउंडेशन के सेक्रेटरी जनरल एडवोकेट नंदन कुमार झा ने अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम में आए लोगों का उत्साहवर्धन किया। योग शिविर में प्रतिभागियों को विभिन्न योग आसनों की जानकारी दी गई और सभी ने स्वास्थ्य लाभ के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: एक वैश्विक अभियान
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पहली बार 21 जून 2015 को मनाया गया था। इसका प्रस्ताव भारत द्वारा 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में रखा गया था, जिसे महज 90 दिनों में 177 देशों के समर्थन से पारित कर दिया गया – जो संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में सबसे तेज़ी से पारित होने वाला प्रस्ताव बना।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ऐतिहासिक भाषण में कहा था:
“योग भारत की प्राचीन परंपरा का अमूल्य उपहार है। यह मस्तिष्क और शरीर, मानव और प्रकृति, विचार और कार्यों, संयम और संतुलन का प्रतीक है।”
21 जून को ही अंतरराष्ट्रीय योग दिवस इसलिए चुना गया क्योंकि यह उत्तरी गोलार्द्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है, जो ऊर्जा और जागरूकता का प्रतीक माना जाता है।
योग अब एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है। यह न केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम है, बल्कि मानसिक शांति, आत्मिक संतुलन और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। इस वर्ष का योग दिवस भी भारत की सांस्कृतिक शक्ति और विश्व को दिए गए एक महत्वपूर्ण उपहार की याद दिलाता है – “योग, एक जीवनशैली।”









