केंद्र सरकार ने संसद के विशेष सत्र में गुरुवार को तीन महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में पेश किए, जिनका सीधा संबंध देश की राजनीतिक संरचना में बड़े बदलाव से है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य वर्ष 2029 तक महिला आरक्षण लागू करना और लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करना है।
सरकार द्वारा प्रस्तुत विधेयकों में संविधान संशोधन से जुड़ा प्रस्ताव, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून में संशोधन शामिल हैं। इनमें से दो विधेयक केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में पेश किए, जबकि तीसरा विधेयक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा रखा गया।
लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति ने इन विधेयकों पर चर्चा के लिए 18 घंटे का समय निर्धारित किया है। बहस गुरुवार के साथ-साथ शुक्रवार को भी जारी रह सकती है। सदन में पारित होने के बाद इन विधेयकों को राज्यसभा भेजा जाएगा।
संविधान संशोधन प्रस्ताव पर प्रारंभिक मतदान में समर्थन और विरोध दोनों पक्षों में उल्लेखनीय संख्या सामने आई है। कई सांसदों ने इस पर अपनी राय दर्ज कराई है और प्रस्ताव पारित होने के बाद विस्तृत चर्चा की जाएगी।
वहीं विपक्ष ने इन विधेयकों को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित बदलाव से कुछ समुदायों, खासकर ओबीसी और मुस्लिमों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों के साथ असमानता हो सकती है।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के संशोधन से संविधान की मूल भावना प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सरकार से इन विधेयकों को वापस लेने की मांग की।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष के सभी सवालों का जवाब दिया जाएगा और विधेयकों पर खुलकर चर्चा की जाएगी।
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इन विधेयकों को लेकर संसद में जारी बहस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है, क्योंकि इनके पारित होने से भारत की चुनावी और राजनीतिक व्यवस्था में बड़े बदलाव संभव हैं।









