Government schemes for farmers in India: देश के अन्नदाताओं के लिए केंद्र और राज्य सरकारें समय-समय पर कई योजनाएं चलाती रहती हैं। भारत, जिसे कृषि प्रधान देश कहा जाता है, की एक बड़ी आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर करती है। किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देना है। ये पहल न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती हैं बल्कि सुरक्षा और आधुनिक कृषि तकनीकों तक पहुंच भी उपलब्ध कराती हैं। आइए जानते हैं किसानों के लिए सरकार की कुछ प्रमुख योजनाओं के बारे में..

1. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan): हर साल 6,000 की सहायता DBT के माध्यम से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत योग्य छोटे और सीमांत किसानों को प्रतिवर्ष 6,000 की सहायता दी जाती है। यह राशि तीन किस्तों में (2,000-2,000) सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खाते में भेजी जाती है। फरवरी 2019 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक 19 किस्तों में 3.68 लाख करोड़ रुपये से अधिक वितरित किए जा चुके हैं। 20वीं किस्त अगस्त 2025 की शुरुआत तक आने की संभावना है।
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2. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY): फसल बीमा का सुरक्षा कवच फरवरी 2016 में शुरू हुई यह योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, बीमारियों या कीटों से होने वाले फसल नुकसान से सुरक्षा प्रदान करती है। PMFBY सस्ती प्रीमियम दरों पर बीमा उपलब्ध कराती है और किसानों की आय को स्थिर बनाने का लक्ष्य रखती है। हालांकि, गुजरात, झारखंड, तेलंगाना और बिहार जैसे कई राज्यों ने उच्च प्रीमियम और क्लेम निपटान की दिक्कतों का हवाला देते हुए योजना से बाहर निकलने का निर्णय लिया।

3. कृषि अवसंरचना कोष (AIF): भंडारण और लॉजिस्टिक्स के लिए सस्ती ऋण सुविधा जुलाई 2020 में शुरू हुए कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के तहत 1 लाख करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है, ताकि एग्री-उद्यमियों, स्टार्टअप्स और किसान समूहों को कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस, पैकेजिंग और कृषि मशीनरी जैसी सुविधाओं के लिए सस्ता ऋण मिल सके। पंजाब में ही आवंटन 4,713 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,050 रुपये करोड़ से अधिक हो गया है और यहां राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा आवेदन आए हैं।

4. मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना: मिट्टी आधारित पोषण सलाह फरवरी 2015 में शुरू हुई इस योजना के तहत किसानों को व्यक्तिगत मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जाते हैं। इन कार्डों में प्रयोगशाला परीक्षण के आधार पर फसलों की पोषण आवश्यकताओं और मिट्टी की कमी का विवरण होता है। इसका उद्देश्य उर्वरकों का संतुलित उपयोग बढ़ाना, लागत घटाना और पैदावार में सुधार करना है।

5. किसान क्रेडिट कार्ड (KCC): सस्ती ब्याज दरों पर अल्पकालिक ऋण 1998 में शुरू हुई किसान क्रेडिट कार्ड योजना को समय-समय पर विस्तारित किया गया है ताकि मत्स्य पालन और डेयरी जैसी सहायक गतिविधियों को भी शामिल किया जा सके। KCC के जरिए किसानों को कार्यशील पूंजी और निवेश ऋण (जैसे सिंचाई, पंप, बीज) मिलता है। संशोधित ब्याज अनुदान योजना (MISS) को FY 26 तक बढ़ा दिया गया है। KCC के माध्यम से 5 लाख रुपये तक का अल्पकालिक ऋण लेने वाले किसानों को मात्र 7% तक की सब्सिडी युक्त ब्याज दर पर सुविधा मिल रही है।
6. प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना: किसानों के लिए पेंशन सुरक्षा प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के तहत 18 से 40 वर्ष के योग्य किसान स्वेच्छा से पंजीकरण करा सकते हैं। इसमें उम्र के अनुसार 55 से 200 रुपये मासिक योगदान करना होता है। इसके बाद 60 वर्ष की आयु पूरी करने पर उन्हें प्रतिमाह 3,000 रुपये की पेंशन मिलेगी। इस योजना में योगदान राशि सीधे PM-Kisan की किस्तों से कटवाई जा सकती है, जिससे यह बेहद सरल हो जाता है।
क्यों महत्वपूर्ण हैं ये योजनाएं?
- DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर): बिचौलियों को खत्म कर सीधे किसानों तक लाभ पहुंचाता है।
- सस्ती ब्याज दरें और बीमा: जोखिम घटाते हैं और किसानों को साहूकारों पर निर्भर होने से बचाते हैं।
- अवसंरचना और मृदा डेटा: दक्षता और स्थायित्व को बढ़ावा देते हैं।
- पेंशन लाभ: वृद्धावस्था में किसानों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करते हैं।
ये योजनाएं किसानों के लिए तत्काल आय सहायता, बीमा और ऋण के जरिए मजबूती, तथा पेंशन व तकनीक के जरिए दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करती हैं।









