किसानों से जल शुल्क वसूलने को लेकर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में किए जा रहे दावों को केंद्र सरकार ने पूरी तरह से भ्रामक और असत्य करार दिया है। जलशक्ति मंत्रालय के अधीन जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों पर किसी भी प्रकार का जल शुल्क लगाने की कोई योजना नहीं है, और ऐसी खबरों से अनावश्यक भ्रम फैलाया जा रहा है।
क्या है सच्चाई?
सरकार द्वारा हाल ही में शुरू किया गया पायलट प्रोजेक्ट “मॉडर्नाइजेशन ऑफ कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट (M-CADWM)” योजना के अंतर्गत है, जो कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) का हिस्सा है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है:
- सिंचाई प्रणाली को अधिक दक्ष बनाना
- जल वितरण में पारदर्शिता और समानता लाना
- आधुनिक तकनीकों जैसे IoT उपकरण, प्रेशराइज्ड पाइपलाइन नेटवर्क, और SCADA सिस्टम का उपयोग बढ़ाना
किसानों पर नहीं पड़ेगा कोई अतिरिक्त बोझ
जलशक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने हाल ही में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह स्पष्ट रूप से कहा था कि इस योजना के तहत किसानों से जल उपयोग के लिए कोई अनिवार्य शुल्क नहीं लिया जाएगा। मीडिया के कुछ हिस्सों ने इस बयान को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया, जिससे किसानों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई।
राज्य सरकारों का होगा निर्णय
मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि भारत के संविधान के अनुसार ‘कृषि’ और ‘जल’ दोनों राज्य विषय हैं। अतः यदि किसी राज्य सरकार द्वारा अपने स्तर पर Water User Associations (WUAs) या लाभार्थियों से कोई शुल्क लिया जाता है, तो वह निर्णय पूरी तरह से राज्य सरकार का अधिकार क्षेत्र है, न कि केंद्र का।
मीडिया से जिम्मेदार रिपोर्टिंग की अपील
मंत्रालय ने मीडिया संस्थानों से अपील की है कि वे तथ्यों की पुष्टि किए बिना कोई भी खबर प्रकाशित न करें, जिससे किसानों में ग़लत संदेश जाए या अनावश्यक घबराहट पैदा हो। यह स्पष्टीकरण पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रामक सूचनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से जारी किया गया है।
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M-CADWM योजना किसानों के लिए लाभकारी और प्रगतिशील कदम है, जिसका मकसद आधुनिक सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराना है – न कि उन पर कोई नया वित्तीय भार डालना। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों की भलाई सर्वोच्च प्राथमिकता है और जल संसाधनों का समुचित व न्यायसंगत उपयोग इस योजना का मूल लक्ष्य है।
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