Who Is Sudan Gurung: नेपाल में पिछले कई दिनों से हिंसा का माहौल है। इसी बीच नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार, 9 सितंबर को इस्तीफा दे दिया, जब कई दिनों से जारी तीव्र प्रदर्शनों ने देश को हिला कर रख दिया। इन प्रदर्शनों का नेतृत्व Gen Z और युवाओं ने किया, जिन्होंने सरकार को भ्रष्ट, तानाशाही और विफल करार दिया। सोमवार, 8 सितंबर को प्रदर्शनकारियों द्वारा संसद भवन पर धावा बोलने और ओली व अन्य मंत्रियों के घरों को निशाना बनाने के बाद हुई पुलिस कार्रवाई में 21 लोग मारे गए और 100 अन्य घायल हो गए।
विरोध की अगुवाई कौन कर रहा है?
इस आंदोलन के केंद्र में हैं सुदन गुरुंग, 38 वर्षीय हामी नेपाल नामक युवा-प्रेरित NGO के अध्यक्ष, जिन्होंने पूरे नेपाल में लोगों को लामबंद किया है।
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सुदन गुरुंग कौन हैं?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुदान गुरुङ, जो वर्तमान प्रदर्शनों का चेहरा बने हैं, हामी नेपाल के अध्यक्ष हैं। यह संगठन भूकंप के बाद पुनर्वास और आपातकालीन राहत कार्यों में मदद करता है।
बताया जाता है कि सुदन गुरुंग एक समर्पित समाजसेवी हैं, जो लगभग एक दशक से अपने NGO के जरिए संसाधन जुटाकर बाढ़, भूस्खलन और भूकंप से प्रभावित समुदायों की मदद कर रहे हैं।
सामाजिक कार्यों से जुड़ने से पहले उनका जीवन पार्टी और क्लबिंग में बीतता था, क्योंकि वे एक इवेंट मैनेजर के तौर पर काम करते थे।
लेकिन 2015 के भूकंप के दौरान एक व्यक्तिगत त्रासदी ने उनकी जिंदगी बदल दी। उस वक्त उन्होंने अपना बच्चा खो दिया। उन्होंने कहा था, एक बच्चा मेरी बाहों में दम तोड़ गया। मैं उस पल को कभी नहीं भूलूंगा।
इसके बाद उन्होंने महसूस किया कि देश में कोई प्रभावी आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम नहीं है, और फिर उन्होंने हामी नेपाल 2020 की शुरुआत की। यह गैर-लाभकारी संगठन बाद में 1,600 से अधिक सदस्यों का समूह बन गया।
‘Gen Z’ प्रदर्शनों में सुदन गुरुंग की भूमिका
गुरुंग और उनकी संस्था हामी नेपाल ने पिछले हफ्ते सरकार द्वारा सोशल मीडिया बैन के फैसले के खिलाफ देशभर में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की अपील की थी। पहले से ही ओली सरकार से निराश और महीनों से राजशाही की वापसी की मांग कर रहे लोग एक सप्ताह पहले से ही सड़कों पर लौट आए थे।
प्रदर्शन तब और तेज हो गए जब सरकार ने 4 सितंबर को सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया। सोमवार को सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ा।
ब्लैकआउट से पहले हामी नेपाल ने अपने इंस्टाग्राम और डिस्कॉर्ड प्लेटफॉर्म पर लोगों से 8 सितंबर को मैतीघर मंडला में इकट्ठा होने की अपील की थी। उन्होंने कुछ वीडियो भी साझा किए थे, जिनका शीर्षक था हाउ टू प्रोटेस्ट यानी कैसे प्रदर्शन करें। इनमें छात्रों से कहा गया था कि वे अपनी यूनिफॉर्म पहनकर किताबें और बैग लेकर प्रदर्शन में शामिल हों।









