राज्यसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर चल रही चर्चा के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखे सवालों की बौछार कर दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कोई नारा नहीं बल्कि एक संवेदनशील मुद्दा है, जिसे हमने नारे में तब्दील कर दिया है। अपने भाषण में उन्होंने सेना के सम्मान, कश्मीर की स्थिति, अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान और नेहरू को लेकर हो रही बहस पर बेबाक टिप्पणी की।
राष्ट्रीय सुरक्षा कोई चुनावी मुद्दा नहीं
मनोज झा ने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा को नारे की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यह गंभीर और मानवीय मामला है। सेना का सम्मान हर दल करता है, लेकिन राजनीतिक फैसलों को सेना से जोड़ना ठीक नहीं है। सेना की खूबसूरती यही है कि उसमें हर धर्म, जाति और वर्ग के लोग एक साथ तिरंगे के नीचे खड़े होते हैं।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी की देशभक्ति मजहब के आधार पर नहीं मापी जा सकती और जो सैनिक देश के लिए जान देते हैं, उनकी शहादत को केवल आंकड़ों में नहीं गिना जा सकता।

नेहरू पर मुकदमा कर दो, बार-बार क्यों लाते हो?
अपने भाषण में मनोज झा ने जवाहरलाल नेहरू को लेकर सरकार की आलोचना पर चुटकी लेते हुए कहा, “नेहरू बार-बार आ जाते हैं। मैंने पिछली बार भी कहा था — बेहतर होगा एक मुकदमा कर दो: ‘जवाहरलाल नेहरू हाज़िर हों’। अगर कोई व्यक्ति 60-70 साल बाद भी आपको परेशान कर रहा है, तो उसमें कुछ तो बात थी।”
उन्होंने कहा कि भारत सरकार को अपनी आलोचना नेहरू के नाम पर टालने की बजाय वर्तमान चुनौतियों पर बात करनी चाहिए।
संसद भी भारत है, सिर्फ सरकार नहीं
प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान पर भी मनोज झा ने सवाल उठाए जिसमें उन्होंने कहा था कि वे “भारत का पक्ष रखने आए हैं।” इस पर झा ने पलटवार करते हुए कहा: “यह संसद भी भारत है। विपक्ष और सत्ता दोनों भारत हैं। प्रधानमंत्री को यहां सरकार का पक्ष रखना चाहिए, देश का नहीं — देश तो यहां पहले से मौजूद है।”
कश्मीर को ज़मीन का टुकड़ा मत समझिए
मनोज झा ने हाल में हुए पहलगाम हमले और उसके बाद कश्मीरियों के रवैये का उल्लेख करते हुए कहा कि आम लोगों ने सेना के साथ मिलकर मदद की, शवों को कंधा दिया, दुकानों के शटर बंद किए और मातम मनाया। “कश्मीर को सिर्फ जमीन का टुकड़ा मत समझिए। वहां लोग बसते हैं, जिन्होंने कुर्बानियां दी हैं। उन्हें आवाज़ मिलनी चाहिए। मैं फिर कहता हूं — कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल कीजिए।”
अमेरिकी राष्ट्रपति को बताइए सदी का सबसे बड़ा झूठा
मनोज झा ने अमेरिकी राष्ट्रपति के उस कथित बयान का ज़िक्र किया जिसमें भारत की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा: “प्रधानमंत्री सदन में आकर उस दावे का खंडन करें और अमेरिकी राष्ट्रपति को सदी का सबसे बड़ा झूठा घोषित करें।”
कांच नहीं टूटा तो क्या पुंछ-राजौरी में जान की कीमत नहीं?
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के बयान — “हमारा एक कांच का टुकड़ा भी नहीं टूटा” — पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा: “अगर कांच नहीं टूटा, तो क्या पुंछ और राजौरी में जो लोग मारे गए, उनकी जान कांच से भी कम कीमती है?”
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राज्यसभा में मनोज झा का भाषण केवल विपक्षी आलोचना नहीं था, बल्कि सरकार को उन बुनियादी सवालों से रूबरू कराना था जो राष्ट्रवाद के नारों के पीछे दब जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेना, देश और राजनीतिक नेतृत्व को एक ही तराजू में तौलना गलत है। संसद में देश का पक्ष हर स्वर में आता है — सरकार का नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र का।









