उत्तराखंड की त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था इन दिनों एक बड़े प्रशासनिक संकट से गुजर रही है। राज्य में ग्राम पंचायत सदस्यों के 33,114 पद अब भी खाली हैं और इन पर उपचुनाव अब दिवाली के बाद कराए जाएंगे। पंचायती राज विभाग ने इसकी पुष्टि की है।
पहले इन पदों पर 15 अक्तूबर तक उपचुनाव कराने की योजना थी और सरकार से इसकी मंजूरी भी मिल चुकी थी। लेकिन नामांकन की प्रक्रिया में ग्रामीणों की कम रुचि और अन्य प्रशासनिक कारणों से यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
कोरम के अभाव से 4843 पंचायतें नहीं बनीं
राज्य के पंचायती राज सचिव चंद्रेश कुमार ने जानकारी दी कि अधिकतर पंचायतों में ग्राम पंचायत सदस्यों के चुनाव के लिए पर्याप्त नामांकन नहीं हुआ। नतीजतन, 4843 ग्राम पंचायतों में दो-तिहाई सदस्य निर्वाचित नहीं हो सके, जिससे उनका गठन ही नहीं हो पाया।
हालांकि इन पंचायतों में ग्राम प्रधान निर्वाचित हुए हैं, लेकिन सदस्यों की कमी के कारण पंचायतों का कामकाज शुरू नहीं हो सका।
उपचुनाव की तिथियां फिर से भेजेगा आयोग
चंद्रेश कुमार के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले उपचुनाव की तिथियों का प्रस्ताव भेजा था जिसे सरकार ने मंजूरी भी दे दी थी। मगर अब आयोग ने इन तिथियों को स्थगित कर दिया है और जल्द ही नई तिथियों का प्रस्ताव भेजा जाएगा। यह निर्णय प्रदेश में कम भागीदारी और कोरम की कमी को देखते हुए लिया गया है।
किन जिलों में सबसे ज्यादा प्रभावित पंचायतें?
प्रदेश के कई जिलों में पंचायतों का गठन नहीं हो पाया है। प्रभावित ग्राम पंचायतों की संख्या इस प्रकार है:
- अल्मोड़ा – 925
- पौड़ी गढ़वाल – 819
- टिहरी गढ़वाल – 680
- चमोली – 448
- पिथौरागढ़ – 378
- उत्तरकाशी – 303
- बागेश्वर – 272
- चंपावत – 265
- नैनीताल – 330
- रुद्रप्रयाग – 208
- देहरादून – 117
- ऊधमसिंह नगर – 98
इन सभी जिलों में ग्राम पंचायतों का कार्य प्रभावी रूप से शुरू नहीं हो पाया है, जिससे विकास कार्यों और स्थानीय योजनाओं पर असर पड़ रहा है।
क्यों नहीं हुए पंचायतों का गठन?
पंचायती राज विभाग के अनुसार, पंचायत गठन न होने के पीछे कई अहम कारण हैं:
- नामांकन न होना
- कोरम की पूर्ति न हो पाना
- नाम निर्देशन पत्रों का जमा न होना
- कुछ क्षेत्रों में चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय लंबित होना
- दो-तिहाई सदस्यों का निर्वाचित न होना
आगे की रणनीति
राज्य निर्वाचन आयोग अब इन स्थितियों का आंकलन कर नई तिथियों के साथ उपचुनाव की तैयारी करेगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों को जागरूक करने और चुनावी भागीदारी बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे ताकि पंचायतें सुचारू रूप से कार्य कर सकें।
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ग्राम पंचायतों का गठन न होना राज्य की जमीनी प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। दिवाली के बाद उपचुनावों के जरिए इस संकट को दूर करने की कोशिश होगी, लेकिन इसके लिए ग्रामीणों की भागीदारी और सरकारी प्रयास दोनों ही अहम होंगे।








