देशभर के एक करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनधारक लंबे समय से आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, इस साल की शुरुआत में सरकार ने आयोग के गठन को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी, लेकिन अब तक न तो आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी हुआ है और न ही आयोग के अध्यक्ष या सदस्यों की नियुक्ति हुई है।
दिवाली तक उम्मीद थी, लेकिन अभी नहीं बनी सहमति
माना जा रहा था कि दिवाली से पहले आयोग का गठन हो सकता है, लेकिन अब साफ हो चुका है कि सरकार अभी भी राज्य सरकारों के साथ व्यापक विचार-विमर्श कर रही है। राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि आयोग पर अंतिम निर्णय लंबित है और अभी केवल तैयारी का चरण चल रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, आयोग के गठन की औपचारिक घोषणा 16 जनवरी 2025 को की गई थी, जिसका उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन की व्यापक समीक्षा करना है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग की प्रक्रिया और रिपोर्टिंग में समय लग सकता है, इसलिए इसका प्रभाव 2026 से पहले लागू होना संभव नहीं दिखता।
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर और क्यों है यह अहम?
फिटमेंट फैक्टर नए वेतन आयोग में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि इसके आधार पर कर्मचारियों के बेसिक वेतन और पेंशन का निर्धारण होता है।
- सातवें वेतन आयोग में यह फैक्टर 2.57 था, जिसके आधार पर न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये और न्यूनतम पेंशन 9,000 रुपये तय की गई थी।
- वर्तमान में डीए (महंगाई भत्ता) और डीआर (महंगाई राहत) 58% तक पहुंच चुका है।
अगर आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को 1.92 बढ़ाया जाता है, तो कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 34,560 रुपये और पेंशन 17,280 रुपये तक जा सकती है।
वहीं, फिटमेंट फैक्टर 2.08 हुआ तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 37,440 रुपये और पेंशन 18,720 रुपये तय हो सकती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि नए वेतन आयोग के लागू होते ही डीए और डीआर स्वतः शून्य हो जाएंगे और फिर नए सिरे से महंगाई भत्ते की गणना शुरू होगी।
कर्मचारी संगठनों की बढ़ती चिंता
सरकारी कर्मचारी संगठनों ने इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब केंद्र सरकार ने आयोग की मंजूरी दे दी है, तो अब देरी समझ से परे है। कई संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
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आठवें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों की उम्मीदें अभी भी जीवित हैं, लेकिन स्पष्ट है कि फिलहाल उन्हें और इंतजार करना पड़ सकता है। जब तक आयोग का नोटिफिकेशन जारी नहीं होता और चेयरमैन की नियुक्ति नहीं होती, तब तक इसके क्रियान्वयन की दिशा में कोई ठोस कदम संभव नहीं है। सरकार की ओर से सभी नजरें अब आगामी महीनों पर टिकी हैं — जहां यह तय होगा कि एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनधारकों को आखिर कब राहत मिलेगी।








