बिहार सरकार ने पंचायत स्तर पर बुनियादी प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से बन रहे पंचायत भवनों की गुणवत्ता जांच के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है। शुक्रवार को राज्य के 160 प्रखंडों की करीब 436 पंचायतों में निर्माणाधीन भवनों का निरीक्षण किया जाएगा। भवन निर्माण विभाग ने इसके लिए 110 सहायक अभियंताओं की 11 विशेष टीमें गठित कर दी हैं।
प्राथमिकता में रखा गया निर्माण कार्य
त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने और चुने हुए प्रतिनिधियों के लिए स्थायी कार्यालय उपलब्ध कराने के लिए राज्य भर में लगभग ढाई हजार पंचायत सरकार भवन बनाए जा रहे हैं। इन भवनों में न केवल कार्यालय बल्कि ग्राम कचहरी, रिकॉर्ड रूम, स्टोर रूम और पंचायत आमसभा व स्थायी समिति की बैठक कक्ष भी शामिल होंगे।
सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि सभी भवनों का निर्माण उच्च गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप हो। इसी को लेकर समय-समय पर औचक निरीक्षण की व्यवस्था की गई है। शुक्रवार को होने वाला निरीक्षण इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

निरीक्षण के दौरान इन पहलुओं की होगी जांच
भवनों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अभियंताओं को यह निर्देश दिया गया है कि निरीक्षण के दिन ही रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपें। रिपोर्ट में निम्नलिखित बिंदुओं का उल्लेख आवश्यक होगा:
- कार्य की भौतिक प्रगति
- प्रयोगशाला जांच प्रतिवेदन
- सीमेंट व अन्य सामग्री की गुणवत्ता
- निर्माण प्रक्रिया की संपूर्णता और ग्रेडिंग
किन जिलों में कितने भवनों की होगी जांच?
राज्य भर के विभिन्न भवन अंचलों में निरीक्षण की योजना बनाई गई है, जिनमें प्रमुख अंचलों में भवनों की संख्या इस प्रकार है:
- पूर्णिया – 40
- सहरसा – 36
- दरभंगा – 52
- मुजफ्फरपुर – 36
- मोतिहारी – 36
- छपरा – 32
- आरा – 40
- गया – 27
- मुंगेर – 27
- भागलपुर – 40
- पटना – 41
सरकार की निगरानी में पारदर्शिता
राज्य सरकार का प्रयास है कि पंचायत स्तर पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करते हुए पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासनिक प्रणाली विकसित की जाए। इसी कड़ी में यह निरीक्षण अभियान सुनिश्चित करेगा कि निर्माण कार्य में किसी तरह की लापरवाही या गुणवत्ता में समझौता न हो।
भवन निर्माण विभाग का कहना है कि निरीक्षण के आधार पर जिन भवनों में गुणवत्ता में कमी पाई जाएगी, वहां संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
यह भी पढ़ें: अब नहीं सुनाई देगी अमिताभ बच्चन की आवाज इस कॉलर ट्यून में
इस व्यापक जांच अभियान के जरिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करना उसकी प्राथमिकता में शामिल है और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।









