Zubeen Garg death: फिल्मी संगीत की दुनिया से एक दुखद खबर आ रही है। एक दुखद घटना में दिग्गज असमिया गायक जुबिन गर्ग का सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग के दौरान 52 वर्ष की आयु में निधन हो गया। अपनी मधुर आवाज़ और संगीत उद्योग में अपार योगदान के लिए मशहूर जुबिन गर्ग के असमय निधन ने संगीत जगत और खासकर असम के उनके चाहने वालों को गहरे सदमे में डाल दिया है।
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जुबिन गर्ग का संगीत कई दशकों तक फैली रही। वह केवल असम ही नहीं, बल्कि पूरे भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक प्रतीक थे, जिनके गाने हर उम्र के श्रोताओं के दिलों में गूंजते थे। लोक संगीत और आधुनिक धुनों को बखूबी मिलाने की उनकी कला ने उन्हें एक बहुमुखी कलाकार बना दिया था। वे सिर्फ अपनी आवाज़ के लिए ही नहीं, बल्कि असमिया संस्कृति से गहरे जुड़ाव के लिए भी जाने जाते थे, जिसे वे अक्सर अपने गीतों में पिरोते थे।
‘या अली’ (फिल्म गैंगस्टर, 2006)
जुबिन का यह गीत आज भी उनके सबसे मशहूर गीतों में शुमार है और सालों बाद भी प्रशंसकों का पसंदीदा बना हुआ है।
बोहाग बिहू’ (असमिया लोक गीत)
असमिया संस्कृति से गहराई से जुड़े एक कलाकार के रूप में, जुबिन का बोहाग बिहू असम के लोगों के दिलों में एक खास जगह रखता है।
जुबिन गर्ग की आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट
16 सितंबर को जुबिन गर्ग ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें उन्होंने घोषणा की थी कि वह 4th नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के लिए सिंगापुर में रहेंगे।
उन्होंने लिखा था, ‘सिंगापुर के दोस्तों, मैं आपको 20 और 21 सितंबर को सिंगापुर के सनटेक में होने वाले 4th नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में आमंत्रित करना चाहूंगा। आइए और भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्से की अनूठी झलक देखें। हम यहाँ गुणवत्तापूर्ण कृषि, शिल्प उत्पाद, चाय का अनुभव, नृत्य शैलियाँ, फैशन शो और शाम के संगीतमय कार्यक्रम लेकर आ रहे हैं, जिसमें रॉक बैंड्स और रैपर्स प्रस्तुति देंगे। मैं इस फेस्टिवल में सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर के रूप में पूरे समय रहूंगा और 20 सितंबर की शाम को अपने लोकप्रिय हिंदी, बंगाली और असमिया गीतों के साथ प्रस्तुति दूंगा। आप सबका स्वागत है, यह शनिवार और रविवार होगा और प्रवेश निशुल्क है। सभी आएं और हमारा समर्थन करें। चीयर्स!’
‘इतनी कम उम्र नहीं थी जाने की’
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जुबिन गर्ग के निधन पर गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
उन्होंने लिखा, ‘आज असम ने अपने सबसे प्रिय बेटों में से एक को खो दिया। यह कहने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं कि जुबिन का असम के लिए क्या मतलब था। वह बहुत जल्दी चले गए, यह उम्र जाने की नहीं थी। जुबिन की आवाज़ में लोगों को ऊर्जा देने की बेजोड़ क्षमता थी और उनका संगीत सीधे हमारे दिल और आत्मा से बात करता था। उन्होंने एक ऐसा खालीपन छोड़ दिया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। आने वाली पीढ़ियाँ उन्हें असम की संस्कृति के महानायक के रूप में याद करेंगी और उनके कार्य आने वाले दिनों और वर्षों में कई प्रतिभाशाली कलाकारों को प्रेरित करेंगे।’









