दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2025 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए अध्यक्ष समेत तीन महत्वपूर्ण पदों पर कब्जा कर लिया है। वहीं, कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI को इस बार केवल उपाध्यक्ष पद से संतोष करना पड़ा। पिछले चुनाव की तुलना में NSUI को एक सीट का नुकसान झेलना पड़ा है।
आर्यन मान बने DUSU अध्यक्ष
ABVP के उम्मीदवार आर्यन मान ने DUSU के सबसे प्रतिष्ठित अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की है। उनके साथ ही कुणाल चौधरी ने सचिव और दीपिका झा ने संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की। इन सभी पदों पर ABVP के प्रत्याशी शुरू से ही मतगणना में आगे चल रहे थे और अंत में उन्होंने निर्णायक बढ़त के साथ जीत पक्की की।
NSUI को झटका, केवल उपाध्यक्ष पद मिला
NSUI की ओर से केवल राहुल झांसल ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। अन्य सभी पदों पर NSUI को हार का सामना करना पड़ा। अध्यक्ष पद की उम्मीदवार जोसलिन नंदिता चौधरी, सचिव पद के कबीर और संयुक्त सचिव पद के लवकुश भड़ाना चुनाव हार गए। उपाध्यक्ष पद के लिए ABVP से गोविंद तंवर मैदान में थे, जिन्हें हार का सामना करना पड़ा।
39.45% वोटिंग, 11 महीने का कार्यकाल
DUSU चुनाव के लिए गुरुवार को मतदान हुआ, जिसमें कुल 39.45% छात्रों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के लिए मतदान होता है, और इन पदों का कार्यकाल कुल 11 महीने का होता है। 12वें महीने में नए चुनाव कराए जाते हैं।
DUSU अध्यक्ष: पावरफुल पद, लेकिन बिना वेतन
DUSU अध्यक्ष का पद भले ही छात्रों के बीच प्रतिष्ठित माना जाता है, लेकिन इस पद पर किसी प्रकार का वेतन नहीं मिलता। अध्यक्ष को न तो मासिक सैलरी दी जाती है और न ही कोई व्यक्तिगत आर्थिक लाभ। हालांकि, जीतने वाले संगठन को छात्र संघ की गतिविधियों के लिए 20 लाख रुपये का बजट मिलता है, जिसे सांस्कृतिक आयोजनों, रिसर्च प्रोजेक्ट्स और यूनिवर्सिटी के छात्रों की भलाई में खर्च किया जाता है।
अध्यक्ष की भूमिका और जिम्मेदारियां
DUSU अध्यक्ष को दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन में विशेष स्थान प्राप्त होता है। उन्हें एक अलग ऑफिस मिलता है और वे प्रशासनिक बैठकों में हिस्सा लेने के पात्र होते हैं। कोई भी नीति, जो छात्रों को प्रभावित करती हो, उस पर अध्यक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। साथ ही, विश्वविद्यालय से जुड़ी समस्याओं को उठाने और समाधान की दिशा में काम करने की जिम्मेदारी भी अध्यक्ष की होती है।
यह पद युवाओं को न केवल नेतृत्व का अवसर देता है, बल्कि कई छात्र नेता इसी रास्ते से मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश करते हैं।
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DUSU चुनाव 2025 में ABVP की यह जीत न केवल संगठन की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि छात्र राजनीति में उसकी पकड़ को भी रेखांकित करती है। वहीं, NSUI के लिए यह नतीजे आत्ममंथन का विषय हैं। आने वाले समय में नई टीम को छात्रों की समस्याओं को उठाने और विश्वविद्यालय में सकारात्मक बदलाव लाने की चुनौती होगी।






