भारत को नया उपराष्ट्रपति मिल गया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने 17वें उपराष्ट्रपति चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करते हुए विपक्षी इंडिया ब्लॉक के प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी को पीछे छोड़ दिया। संसद भवन में शुक्रवार को हुए मतदान में सांसदों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जिसके बाद देर शाम परिणाम घोषित किए गए।
इस चुनाव में कुल 767 सांसदों ने वोट डाले, जिनमें से 752 वोट वैध पाए गए, जबकि 15 वोट अवैध घोषित किए गए। सीपी राधाकृष्णन को प्रथम वरीयता के 452 वोट प्राप्त हुए, जबकि बी. सुदर्शन रेड्डी को केवल 300 वोट मिले। इससे राधाकृष्णन की जीत स्पष्ट और व्यापक समर्थन वाली साबित हुई।
संसद में हुई थी मतदान प्रक्रिया
17वें उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संसद भवन परिसर में कराया गया। भारत की संसद (लोकसभा और राज्यसभा) में कुल 788 सदस्य होते हैं, लेकिन इस समय 7 सीटें रिक्त हैं। इस प्रकार 781 सांसदों को वोट देने का अधिकार था, जिनमें से 13 सांसदों ने मतदान में भाग नहीं लिया।
किसने नहीं किया मतदान?
जो सांसद मतदान से दूर रहे, उनमें तेलंगाना की बीआरएस के 4, ओडिशा की बीजेडी के 7, शिरोमणि अकाली दल का 1, और 1 निर्दलीय सांसद शामिल हैं। वहीं, एनडीए खेमे से 427 सांसदों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि राधाकृष्णन को एनडीए के साथ-साथ कुछ निर्दलीय और संभवतः अन्य दलों से भी समर्थन मिला है।
विपक्ष को नहीं मिला अपेक्षित समर्थन
इंडिया ब्लॉक के प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी को विपक्ष की ओर से समर्थन तो मिला, लेकिन उनकी संख्या राधाकृष्णन के मुकाबले कम साबित हुई। विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी एकता अभी भी बिखरी हुई है और यही कारण रहा कि वह इस महत्वपूर्ण चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया।
राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर
सीपी राधाकृष्णन एक अनुभवी नेता हैं और लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं। वे पूर्व में कोयंबटूर से लोकसभा सांसद रह चुके हैं और पार्टी के संगठन में भी विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उनकी छवि एक साफ-सुथरे और समर्पित जनप्रतिनिधि की रही है।

इस चुनावी परिणाम ने न केवल एनडीए की मजबूत स्थिति को एक बार फिर स्पष्ट किया है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि विपक्ष को अभी और संगठित होने की जरूरत है। अब सभी की नजरें नए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की कार्यशैली और उनकी संवैधानिक भूमिका पर टिकी रहेंगी।









