केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने कोचिंग संस्थान दृष्टि आईएएस (VDK Eduventures Pvt. Ltd.) पर UPSC CSE 2022 के परिणामों को लेकर भ्रामक विज्ञापन प्रसारित करने के मामले में 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत की गई है।
दृष्टि आईएएस ने अपने विज्ञापन में दावा किया था कि 216 से अधिक अभ्यर्थी उनके संस्थान से सफल हुए हैं, लेकिन जांच में पाया गया कि यह दावा भ्रामक था और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई गई थीं।
जांच में सामने आए तथ्य
CCPA की विस्तृत जांच में यह स्पष्ट हुआ कि संस्थान द्वारा जिन 216 सफल अभ्यर्थियों का हवाला दिया गया था, उनमें से 162 उम्मीदवारों ने केवल साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम (IGP) में हिस्सा लिया था, वो भी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा स्वतंत्र रूप से उत्तीर्ण करने के बाद।
जबकि केवल 54 अभ्यर्थियों ने IGP के अलावा अन्य नियमित कोर्स में दाखिला लिया था। इन तथ्यों को विज्ञापन में उजागर नहीं किया गया, जिससे आम उपभोक्ताओं और अभ्यर्थियों को यह गलतफहमी हुई कि इनकी सफलता का पूरा श्रेय दृष्टि आईएएस को जाता है।
पहले भी लगाया गया था जुर्माना
यह पहली बार नहीं है जब दृष्टि आईएएस को भ्रामक प्रचार के लिए दंडित किया गया हो। सितंबर 2024 में भी CCPA ने UPSC CSE 2021 के परिणामों को लेकर किए गए भ्रामक दावे (“150+ चयन”) के लिए 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
उस समय भी संस्थान ने 161 चयनित अभ्यर्थियों का विवरण दिया था, जिनमें से अधिकांश सिर्फ IGP या अन्य लघु अवधि के कार्यक्रमों में नामांकित थे। CCPA ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी थी कि संस्थान भविष्य में ऐसे दावों से बचे।
बार-बार चेतावनी के बावजूद जारी रहा भ्रामक प्रचार
CCPA ने इस बात पर चिंता जताई कि पहले से दंडित और चेतावनी दिए जाने के बावजूद, दृष्टि आईएएस ने UPSC CSE 2022 के लिए भी उसी तरह का भ्रामक दावा (“216+ चयन”) दोहराया। यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत संस्थान के द्वारा नियमों की स्पष्ट अवहेलना का संकेत है।
छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन
CCPA का कहना है कि जब कोचिंग संस्थान अपने विज्ञापनों में कोर्स के प्रकार, अवधि और प्रभाव को लेकर पारदर्शिता नहीं बरतते, तो इससे छात्र और उनके अभिभावक गलत निर्णय लेने को मजबूर होते हैं।
ऐसे दावों से न सिर्फ झूठी उम्मीदें पैदा होती हैं, बल्कि यह अभ्यर्थियों के “सूचित विकल्प” के अधिकार का भी उल्लंघन है, जो अधिनियम की धारा 2(9) के तहत संरक्षित है।

54 संस्थानों को नोटिस, अब तक 90 लाख से अधिक का जुर्माना
अब तक CCPA ने भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए 54 कोचिंग संस्थानों को नोटिस भेजे हैं। इनमें से 26 संस्थानों पर कुल मिलाकर 90.6 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है।
इनमें अधिकतर संस्थानों द्वारा अपने विज्ञापनों में सफल अभ्यर्थियों की तैयारी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को छुपाने का आरोप पाया गया।
CCPA की सख्त चेतावनी
प्राधिकरण ने सभी कोचिंग संस्थानों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि विज्ञापनों में पारदर्शिता नहीं बरती गई तो और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्रचार-प्रसार में कोई भ्रामक तत्व न हो और सभी तथ्य पूरी तरह से स्पष्ट और सत्य हों।
यह भी पढ़ें: ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के इतने लड़ाकू विमान मार गिराए, वायुसेना प्रमुख एपी सिंह का बड़ा खुलासा
यह मामला एक बार फिर इस बात की पुष्टि करता है कि शिक्षा क्षेत्र में विश्वास और पारदर्शिता कितनी जरूरी है। CCPA की सख्ती से स्पष्ट है कि अब भ्रामक दावों और झूठे प्रचार के सहारे छात्रों को गुमराह करने वाले संस्थानों की खैर नहीं।









