FMCG सेक्टर से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार द्वारा सितंबर 2025 में दी गई जीएसटी दरों में कटौती का फायदा अब धीरे-धीरे कम होता दिख रहा है। उस समय टैक्स में राहत मिलने से कई रोजमर्रा के उत्पादों की कीमतों में नरमी आई थी। लेकिन अब फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) कंपनियां लागत बढ़ने के दबाव के चलते दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं।
बताया जा रहा है कि कई कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में करीब 2% से 5% तक इजाफा कर सकती हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ना तय है।
क्यों बढ़ रहे हैं FMCG उत्पादों के दाम?
कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, कच्चे तेल के दाम और रुपये की कमजोरी ने लागत बढ़ा दी है। जीएसटी कटौती के बाद कुछ समय तक कंपनियों ने कीमतें स्थिर रखीं, लेकिन अब मार्जिन पर दबाव बढ़ने से दाम बढ़ाना मजबूरी बन गया है।
डिस्ट्रीब्यूटर्स के अनुसार डिटर्जेंट, हेयर ऑयल, चॉकलेट और नूडल्स जैसे उत्पाद नए और ऊंचे रेट पर बाजार में आने लगे हैं।
Dabur India ने किया कीमत बढ़ाने का ऐलान
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक Dabur India के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने बताया है कि कंपनी चालू तिमाही में करीब 2% तक कीमतें बढ़ा रही है।
डाबर जूस, हेयर ऑयल और अन्य FMCG उत्पाद बनाती है। कंपनी का कहना है कि एंटी-प्रॉफिटियरिंग नियमों के चलते पहले कीमतों में बढ़ोतरी टालनी पड़ी थी, लेकिन मौजूदा लागत दबाव के बीच यह कदम उठाना आवश्यक हो गया है।
होम और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स भी होंगे महंगे
साबुन, शैंपू और डिटर्जेंट जैसे होम और पर्सनल केयर उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इन उत्पादों के निर्माण में कच्चे तेल आधारित कच्चे माल का उपयोग होता है, जिसकी लागत में उछाल आया है।
Hindustan Unilever के सीएफओ निरंजन गुप्ता ने संकेत दिया है कि होम केयर कैटेगरी में जल्द कीमतों में संशोधन किया जा सकता है। कंपनी के कुछ उत्पाद पहले ही नए दामों के साथ बाजार में आ चुके हैं।
हिंदुस्तान यूनिलीवर सर्फ एक्सेल और रिन जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स का निर्माण करती है, जिनकी कीमतों में बदलाव का सीधा असर लाखों परिवारों पर पड़ सकता है।
उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
FMCG उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का मतलब है कि रोजमर्रा के खर्च में इजाफा होगा। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे माल की कीमतों में राहत नहीं मिली तो आने वाले महीनों में अन्य कंपनियां भी दाम बढ़ाने की राह पर चल सकती हैं।
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GST राहत के बाद मिली अस्थायी राहत अब खत्म होती नजर आ रही है। FMCG सेक्टर में लागत दबाव के चलते कीमतों में बढ़ोतरी का दौर शुरू हो चुका है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार और कंपनियां उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए क्या कदम उठाती हैं।







