बांग्लादेश की एक विशेष अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को निहत्थे नागरिकों पर गोली चलाने और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों में दोषी पाया है। अदालत ने उनके खिलाफ फांसी की सजा का फैसला सुनाया है।
आरोप और साजिश का पाठ्यक्रम
- न्यायाधिकरण (ICT) ने पाया कि हसीना ने विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों और अन्य नागरिकों को दबाने के लिए घातक हथियारों, ड्रोन, और हीलिकॉप्टर का इस्तेमाल करने के आदेश दिए थे।
- साथ ही, उन्होंने प्रदर्शनकारियों को “निशाना बनाने” की एक कोर कमेटी गठित की थी, जिसमें आवामी लीग समर्थकों सहित विभिन्न घटक शामिल थे। कोर्ट के मुताबिक, इस रणनीति के जरिये उन्होंने हिंसा को सुनियोजित दिशा में मोड़ने की कोशिश की।
- गवाहों के बयानों और साक्ष्यों की विस्तृत जांच के बाद, अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला कि हसीना और उनके सहयोगियों के आदेशों पर ही मानवता के खिलाफ अपराधों का अंजाम दिया गया। अदालत ने कुल 54 गवाहों के बयान दर्ज किए।
न्यायाधीशों का संकेत
- ICT के मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि हसीना ने फोन वार्तालापों में छात्रों को अपमानित किया और उन्हें “हिंसक कार्रवाई” के निर्देश दिए थे। अदालत को विश्वविद्यालय के कुलपति के साथ उनकी बातों का रिकॉर्ड भी मिला है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनके आदेश जानबूझकर और योजनाबद्ध थे।
- न्यायाधिकरण ने इन आदेशों को “जान लेने की योजना” करार दिया, न कि केवल सार्वजनिक व्यवस्था को स्थिर करने की कार्रवाई।
आईजीपी (पुलिस प्रमुख) और अन्य मामलों में लिप्तता
- अदालत ने संकेत दिया है कि पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) भी इस साजिश में शामिल हो सकते हैं, क्योंकि उनकी संलिप्तता की ओर सबूत मिले थे।
- 19 जुलाई के बाद गृह मंत्रालय के आवास में लगातार बैठकें हुई थीं, जिसमें छात्र आंदोलन को कुचलने के निर्देश दिए गए।
अतिरिक्त जांच और रिपोर्ट
- सरकार के खिलाफ गवाहों के बयान, राज्य के रिकॉर्ड और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की रिपोर्ट का विश्लेषण किया गया। अदालत ने कहा है कि ये रिपोर्टें मिलकर इस निष्कर्ष की ओर इशारा करती हैं कि हसीना की भूमिका सिर्फ नीतिगत नहीं थी, बल्कि उन्होंने “रूपरेखा” और “आदेश” दोनों दिए थे।
- न्यायाधिकरण ने यह भी रेखांकित किया कि कार्रवाई सुनियोजित और व्यवस्थित थी — न कि कोई पैराज-घरेलू झड़प।
राजनीतिक माहौल और प्रतिक्रिया
- यह मुकदमा और फैसला बांग्लादेश में राजनीतिक संवेदनशीलता को और बढ़ा सकते हैं।
- हसीना की अपनी तरफ से इन आरोपों को उन्होंने खारिज किया है, और कहती रही हैं कि यह मुकदमा राजनीतिक प्रेरित है।
- वहीं, कुछ मानवाधिकार समूहों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने ऐसे सवाल उठाए हैं कि क्या सारे कानूनी मानदंडों का पालन हुआ है, और क्या निष्पक्ष सुनवाई होती रही है।
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