भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वरिष्ठ अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। इस मामले में जहां पहले ही सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल है, वहीं अब पूरन कुमार की पत्नी और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी अमनीत पी. कुमार ने चंडीगढ़ पुलिस को पत्र लिखकर एफआईआर पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को “अधूरी और पक्षपातपूर्ण” बताया है।
एफआईआर में नहीं जोड़े गए आरोपी अधिकारियों के नाम: अमनीत का आरोप
IAS अमनीत ने एसएसपी चंडीगढ़ को भेजे अपने पत्र में साफ तौर पर कहा है कि उनके पति की आत्महत्या के लिए जिन दो अधिकारियों – हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) शत्रुजीत कपूर और रोहतक के पुलिस अधीक्षक (SP) नरेंद्र बिजारणिया – को जिम्मेदार ठहराया गया था, उनके नाम एफआईआर के कॉलम नंबर 7 में शामिल ही नहीं किए गए।
उन्होंने लिखा, “मेरी लिखित शिकायत में जिन अधिकारियों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज किए गए थे, उन्हें एफआईआर में अभियुक्त के तौर पर जोड़ा नहीं गया है। यह गंभीर चूक है और इससे न्याय की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।”
SC/ST एक्ट की धाराएं भी गलत ढंग से लगाई गईं: पत्र में दावा
पत्र में IAS अमनीत ने यह भी कहा है कि उनके पति अनुसूचित जाति से थे, और इसलिए इस मामले में SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की उपयुक्त धाराएं लागू होनी चाहिए थीं। उन्होंने विशेष रूप से धारा 3(2)(v) को लागू करने की मांग की है, जो अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्ति पर अत्याचार और उसके कारण मृत्यु होने की स्थिति में लागू होती है।
“मौजूदा धाराएं इस मामले की गंभीरता को नहीं दर्शातीं। एफआईआर में सही और सटीक कानूनी धाराओं को शामिल किया जाना चाहिए,” – उन्होंने पत्र में लिखा।
‘अंतिम नोट’ की प्रति अब तक नहीं दी गई: दस्तावेज़ पर भी सवाल
अमनीत ने यह भी शिकायत की है कि उन्हें अब तक वाई. पूरन कुमार के दो ‘अंतिम नोट’ – एक जो उनके कपड़ों से बरामद हुआ और दूसरा जो उनके लैपटॉप बैग से मिला – की प्रतियां नहीं दी गई हैं। उन्होंने मांग की है कि इन दोनों नोटों की प्रमाणित प्रतियां उन्हें तत्काल सौंपी जाएं ताकि वे एफआईआर में उल्लिखित वर्जन से उनका मिलान कर सकें।
क्या DGP जाएंगे छुट्टी पर? प्रशासन में हलचल
इस मामले में डीजीपी शत्रुजीत कपूर और एसपी नरेंद्र बिजारणिया जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आने से हरियाणा प्रशासन में हलचल मच गई है। सूत्रों की मानें तो जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए डीजीपी को छुट्टी पर भेजे जाने की सिफारिश भी की जा सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पूरन कुमार ने 7 अक्टूबर को की थी आत्महत्या
गौरतलब है कि IPS वाई. पूरन कुमार ने 7 अक्टूबर 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली थी। प्रारंभिक जांच में मानसिक तनाव की बात सामने आई थी, लेकिन उनके सुसाइड नोट में कथित रूप से वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न का उल्लेख किया गया है।
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न्याय की उम्मीद में परिवार
IAS अमनीत पी. कुमार द्वारा उठाए गए सवाल अब इस संवेदनशील मामले में जांच एजेंसियों और न्याय प्रणाली के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं। परिवार की मांग है कि आत्महत्या के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर उचित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए और निष्पक्ष जांच हो।









