राज्यसभा में वंदे मातरम पर जारी बहस बुधवार को तब और तेज़ हो गई जब नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री अमित शाह के बयानों का जोरदार जवाब देते हुए सरकार पर कई मोर्चों पर हमला बोला। खड़गे ने अपनी बात की शुरुआत वंदे मातरम के नारे के साथ की और कहा कि वह छह दशक से इस गीत को गा रहे हैं, जबकि “कुछ लोग” अभी इसे हाल के समय में ही अपनाने का दिखावा कर रहे हैं।
“नेहरू को नीचा दिखाने की कोशिश नाकाम, वे हमेशा ऊँचे रहेंगे”
अमित शाह द्वारा दिए गए ऐतिहासिक संदर्भों पर प्रतिक्रिया देते हुए खड़गे ने कहा कि सरकार लगातार पंडित जवाहरलाल नेहरू की छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन “नेहरू सबसे ऊँचे थे, हैं और आगे भी सबसे ऊँचे रहेंगे।” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग नेहरू को नीचा दिखाना चाहते हैं, “वे खुद नीचे हैं और नीचे ही रहेंगे।”
चीन के मुद्दे पर सरकार पर था सीधा हमला
चीन विवाद को लेकर खड़गे सरकार पर आगबबूला दिखे। उन्होंने आरोप लगाया कि पड़ोसी देश का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है लेकिन केंद्र सरकार “चीन के खिलाफ एक शब्द बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही।” उन्होंने बाहरी मामलों के मंत्री के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें भारत की अर्थव्यवस्था को चीन की तुलना में छोटी बताया गया था।
खड़गे ने प्रधानमंत्री के 19 जून 2020 के बयान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह कहना कि “न कोई घुसा है, न घुस आया है” देश को गलत संदेश देता है।
“वंदे मातरम को कांग्रेस ने दिया था आंदोलन का स्वरूप”
अपने संबोधन में खड़गे ने कांग्रेस के ऐतिहासिक योगदान पर जोर देते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम को नारा बनाने का कार्य कांग्रेस ने किया था। उन्होंने बताया कि 1896 में कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे मंच से गाया था।
खड़गे ने यह भी कहा कि जिन लोगों का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम से दूर रहा है, वे आज कांग्रेस को राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

अर्थव्यवस्था पर चिंता—“रुपया टूटकर बिखर रहा है”
देश की आर्थिक स्थिति पर खड़गे ने केंद्र सरकार पर कड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट बेहद चिंताजनक है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा, “रुपये की दशा आज ऐसी हो गई है जैसे हिमालय से गिरने पर शव के टुकड़े मिलते भी नहीं।”
उनके इस बयान पर सत्तापक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा खड़े होकर इसका विरोध करने लगे।
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सदन में तीखी नोकझोंक जारी
खड़गे के भाषण के दौरान कई बार हंगामा हुआ, लेकिन उन्होंने अपना वक्तव्य जारी रखते हुए कहा कि सरकार जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए राष्ट्रगीत की चर्चा को राजनीतिक मोड़ दे रही है।









