लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चल रही बहस सोमवार को उस समय बेहद तीखी हो गई जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार और संस्थाओं पर गंभीर आरोप लगा दिया। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता को समझने के लिए खादी और देश के पारंपरिक वस्त्रों को देखना काफी है—“खादी सिर्फ कपड़ा नहीं, भारत की आत्मा है। हमारा देश भी एक फैब्रिक है, जिसके हर धागे की अपनी ताकत है।”
राहुल ने असम का गमछा, कांचीपुरम की साड़ी सहित देश के विविध वस्त्रों का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत 150 करोड़ लोगों से बना ऐसा फैब्रिक है, जिसमें सभी धागे बराबर हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने दावा किया कि देश की संस्थाओं पर एक विशेष संगठन का प्रभाव बढ़ रहा है।
“संस्थाओं पर कब्जा, नियुक्तियाँ योग्यता पर नहीं—संगठन पर आधारित”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश के ज्यादातर विश्वविद्यालयों में कुलपति एक खास विचारधारा से जुड़े लोगों में से चुने जा रहे हैं। इसके बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जोरदार आपत्ति जताई।
स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें विषय पर रहने की सलाह दी और कहा कि किसी संगठन का नाम लेने से बचें। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा कि सदन उनका पक्ष सुनना चाहता है, लेकिन बहस मुद्दे पर ही रहे।
विपक्ष के नेता ने अपनी बात पर अड़े रहते हुए कहा कि सीबीआई, ईडी और चुनाव आयोग पर भी समान विचारधारा वाले लोगों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिसंबर 2023 में चुनाव आयुक्तों को दंड से संरक्षण देने का नियम बदलना 2024 के चुनावों के ठीक पहले किया गया था।

चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल
राहुल ने कहा कि चुनाव आयोग से जुड़े कई फैसले सरकार की सहूलियत के हिसाब से लिए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इस बात के प्रमाण हैं कि कई राज्यों में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा में मतदाता सूची में “एक ब्राजीलियन महिला की तस्वीर 22 बार छापी गई” और बिहार में SIR जांच के बाद 1,22,000 डुप्लीकेट फोटो पाई गईं।
स्पीकर ने उन्हें गरिमा बनाए रखने की हिदायत दी, जिस पर राहुल गांधी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी को अपमानित करना नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की सच्चाई सामने लाना है।
“चुनाव सुधारों की आवश्यकता बेहद जरूरी”
राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम अनिवार्य हैं—
- मशीन रीडेबल वोटर लिस्ट चुनाव से कम से कम एक महीने पहले सभी दलों को दी जाए।
- सीसीटीवी फुटेज नष्ट करने से जुड़े नियम बदले जाएं।
- ईवीएम मशीनों की जांच राजनीतिक दलों को करने दी जाए।
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उन्होंने कहा, “वोट चोरी देश के साथ गद्दारी है। हम दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं, लेकिन सरकार चुनाव सुधारों से बच रही है।”









