इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की सेहत सुधारना, उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल बढ़ाना, जल संरक्षण को प्रोत्साहित करना और किसानों को आधुनिक व पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना है। इसके तहत देशभर में किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, किसान सम्मेलन, चौपाल और खेतों में व्यावहारिक प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरकों के इस्तेमाल पर जोर
‘खेत बचाओ अभियान–रबी 2026’ के तहत किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरकों और अन्य कृषि सामग्रियों का सही मात्रा में इस्तेमाल करने के बारे में जानकारी दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य अनावश्यक कृषि लागत को कम करने के साथ मिट्टी के स्वास्थ्य और उत्पादकता को बेहतर बनाना है।
अभियान में हरित अमोनिया और जैविक एवं जैव-आधारित कृषि उत्पादों के उचित इस्तेमाल के बारे में भी जागरूकता फैलाई जाएगी। किसानों को प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली और पुनरुत्पादक कृषि यानी रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर की बेहतर पद्धतियों से परिचित कराया जाएगा।
दलहन-तिलहन की खेती और फसल विविधीकरण को मिलेगा बढ़ावा
अभियान के दौरान किसानों को पारंपरिक फसल चक्र पर निर्भरता कम करने और उपयुक्त फसलों व किस्मों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। तिलहन और दलहन की खेती को बढ़ावा देने के साथ बागवानी मिशनों के जरिए फसल विविधीकरण पर भी ध्यान दिया जाएगा।
धान की कटाई के बाद खाली रह जाने वाले खेतों का बेहतर इस्तेमाल करना भी अभियान का अहम हिस्सा है। इसके लिए किसानों को मिश्रित खेती, उपयुक्त फसलों के चयन और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के बारे में जानकारी दी जाएगी।
पराली प्रबंधन से लेकर जल संरक्षण तक पर फोकस
‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत फसल अवशेष प्रबंधन, एकीकृत कीट प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और जलवायु-अनुकूल खेती जैसे विषयों पर विशेष जोर रहेगा। किसानों को फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के तरीके बताए जाएंगे।
इसके अलावा जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को प्रोत्साहित किया जाएगा। कृषि में पानी के कुशल इस्तेमाल और संसाधनों की बचत करने वाली तकनीकों को अपनाने के लिए भी किसानों को प्रेरित किया जाएगा।
अभियान में कृषि मशीनीकरण और नई तकनीकों का खेतों में प्रदर्शन भी किया जाएगा, ताकि किसान इन तरीकों को व्यावहारिक रूप से समझ सकें और अपनी खेती में उनका उपयोग कर सकें।
किसान आईडी, फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड पर भी जागरूकता
इस अभियान का उद्देश्य केवल खेती की तकनीकों तक सीमित नहीं है। इसके तहत किसानों को सरकारी योजनाओं और कृषि से जुड़े अवसरों की जानकारी भी दी जाएगी।
- किसान आईडी: किसानों को किसान पहचान पत्र बनवाने में सहायता दी जाएगी।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: फसल बीमा के लाभ और प्रक्रिया के बारे में जागरूकता फैलाई जाएगी।
- किसान क्रेडिट कार्ड: योजना का दायरा बढ़ाने और किसानों तक इसकी जानकारी पहुंचाने पर जोर रहेगा।
- व्यापार समझौते: किसानों को व्यापार समझौतों से मिलने वाले संभावित लाभों और अवसरों के बारे में बताया जाएगा।
- बीज वितरण: बेहतर कृषि उत्पादन के लिए बीजों की उपलब्धता और वितरण से जुड़े प्रयासों को भी अभियान में शामिल किया जाएगा।
गांव से राज्य स्तर तक होंगे जागरूकता कार्यक्रम
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें किसान सम्मेलन, किसान चौपाल, प्रशिक्षण सत्र और खेतों में व्यावहारिक प्रदर्शन शामिल होंगे।
इसके क्रियान्वयन में राज्य कृषि विभागों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संस्थानों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसियों (ATMA) की भागीदारी होगी।
कृषि वैज्ञानिकों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और प्रगतिशील किसानों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा। स्थानीय भाषाओं में प्रचार सामग्री के अलावा रेडियो, दूरदर्शन और सोशल मीडिया के जरिए किसानों तक जानकारी पहुंचाई जाएगी।
एक करोड़ लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के इस अभियान के तहत करीब एक करोड़ प्रतिभागियों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसियों को शामिल करते हुए कुल 4,150 टीमें बनाई जाएंगी।
अभियान में 12,000 से अधिक वैज्ञानिकों और एटीएमए कर्मचारियों के योगदान देने की उम्मीद है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राज्य सरकारों, आईसीएआर संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर अभियान के क्रियान्वयन और नियमित निगरानी पर काम करेगा।
टिकाऊ खेती और किसानों की समृद्धि पर सरकार का जोर
‘खेत बचाओ अभियान–रबी 2026’ के जरिए सरकार मिट्टी और पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के साथ खेती को अधिक कुशल, किफायती और जलवायु के अनुकूल बनाने पर ध्यान दे रही है। बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाने और किसानों की भागीदारी बढ़ाने के जरिए कृषि क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता मजबूत करने का लक्ष्य है।
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सरकार को उम्मीद है कि अभियान के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक खेती, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलेगी, जिससे उनकी दीर्घकालिक समृद्धि और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकेगी।









